कोलकाता। ममता बनर्जी ने एक बार फिर बेहद आक्रामक तेवर दिखाते हुए साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव में इस्तीफा नहीं देंगी। अपने बयान में ममता बनर्जी ने कहा कि “अगर किसी को हटाना है तो मुझे बर्खास्त कर दो, लेकिन मैं खुद इस्तीफा नहीं दूंगी।” उनके इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि ममता बनर्जी का यह बयान सीधे तौर पर विपक्ष और केंद्र सरकार पर निशाना माना जा रहा है। हाल के दिनों में राज्य में बढ़ते राजनीतिक तनाव, हिंसा और प्रशासनिक विवादों के बीच मुख्यमंत्री लगातार रक्षात्मक के बजाय आक्रामक रणनीति अपनाती दिखाई दे रही हैं।
सूत्रों के मुताबिक, ममता बनर्जी ने अपनी पार्टी के विधायकों और नेताओं को भी नया राजनीतिक टास्क सौंप दिया है। उन्होंने सभी विधायकों से कहा है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार सक्रिय रहें, जनता के बीच जाएं और विपक्ष के आरोपों का आक्रामक तरीके से जवाब दें। साथ ही पार्टी संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने और ग्रामीण इलाकों में जनसंपर्क अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में यह भी कहा गया कि विपक्ष राज्य में अस्थिरता का माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है, इसलिए पार्टी नेताओं को सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक सक्रिय रहना होगा। ममता ने विधायकों को जनता से सीधे संवाद बढ़ाने, सरकारी योजनाओं का प्रचार करने और विरोधी दलों के “भ्रामक प्रचार” का जवाब देने का निर्देश दिया।


