भारत समेत 60 देशों पर नए टैरिफ की तैयारी में अमेरिका
चीन, जापान, भारत, दक्षिण कोरिया, ब्राजील, स्विट्जरलैंड समेत कई अन्य देशों पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव
नई दिल्ली। एक ओर अमेरिका भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी और मजबूत व्यापारिक रिश्तों की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर नए टैरिफ की तलवार लटकाकर दबाव की राजनीति भी जारी रखे हुए है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर चल रही अहम वार्ताओं के बीच अमेरिकी प्रशासन ने भारत समेत 60 देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव पेश कर नया विवाद खड़ा कर दिया है।
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (यूएसटीआर) ने दावा किया है कि भारत सहित दर्जनों देश जबरन श्रम से निर्मित वस्तुओं के निर्यात को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठा रहे हैं। इसी आधार पर इन देशों के उत्पादों पर 10 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव सामने रखा गया है। हैरानी की बात यह है कि इस सूची में भारत के साथ ब्रिटेन, जापान, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे अमेरिका के करीबी सहयोगी देश भी शामिल हैं।
टैरिफ प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कवायद चल रही है। दोनों देशों के बीच बाजार पहुंच, कृषि, डिजिटल व्यापार और सीमा शुल्क जैसे मुद्दों पर लगातार बातचीत हो रही है। ऐसे में अमेरिका का यह कदम वार्ता प्रक्रिया पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
यूएसटीआर का कहना है कि इन देशों की नीतियां अमेरिकी व्यापार और श्रमिकों के हितों को प्रभावित करती हैं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि “जबरन श्रम” का मुद्दा अब व्यापारिक हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अमेरिका अपनी स्थिति मजबूत करना चाहता है।
भारत के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका उसका सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। यदि प्रस्तावित शुल्क लागू होता है तो कई भारतीय उत्पादों की अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय से पहले अमेरिकी प्रशासन ने इस प्रस्ताव पर सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी हैं और अभी यह प्रक्रिया प्रारंभिक चरण में है।
व्यापारिक गलियारों में इस कदम को ट्रंप प्रशासन की आक्रामक टैरिफ नीति का नया अध्याय माना जा रहा है। ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते की 99 प्रतिशत शर्तें लगभग तय बताई जा रही हैं, अमेरिका का यह प्रस्ताव रिश्तों में नई कड़वाहट और अनिश्चितता पैदा कर सकता है।


