यूथ इंडिया (शरद कटियार)
फर्रुखाबाद। फतेहगढ़ दरवार से उठती एक अजीब सी गूंज जिसमें चर्चा है कि ऊपर से……रामनाम जपना, भीतर से कमीशन का माल अपना। प्रशासनिक गलियारों में एक ऐसा अद्श्य चेहरा सक्रिय बताया जा रहा है जिसे लोग सांकेतिक तौर पर नारायण कर रहे है। माथे पर चंदन, भाषा में भक्ति और व्यवहार में लेनदेन यही वह मिश्रण है जिसने पूरे तंत्र को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।
बताया जाता है कि विकास की फाइलें बिना संकीर्तन आगे ही नही बढ़तीं चाहे बाबा नींब करोरी धाम के सौंदर्यीकरण का मामला हो या नगर पंचायत और पालिकाओं के बजट हों या फिर शमसान घाट तक जाने वाली अंतिम यात्रा की सडक़ हर ओर एक ही गूंज सुनाई देती है। नमामि गंगे प्रोजेक्ट में तो लूट के सारे रिकॉर्ड ही टूट गये दसवां वर्ष और प्रगति ३० फीसदी सफेद कुर्ता वाले भी गंगा तीरे लगे मोटर पकड़ फोटो खिंचा अपना ले गये। नारायण ने तो रहा सहा अकेले ही चट कर दिया।
शमसान से पांचाल घाट तक बन रही सडक़ प्रोजेक्ट के घटिया और धीमे काम ने तो सीएम योगी की कुर्ती की दागदार कर दी। वहीं जिले के विकास का पहिया तो ठप हो ही गया जो काम भी हो रहे उनकी भी लीपापोती ऐसी चल रही जो बरसात से पहले बूंदा बांदी में ही बह चलनी तय हैं।
चौकानें वाली बात तो यह है कि धार्मिक आयोजन और मेलों, गोवंश आश्रय स्थलों तक में कथित तौर पर नारायण की कमीशन संस्कृति की काला छाया प्रभावी हो चुकी है। मेला श्रीराम नगरिया जैसे पौराणिक मेले की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ चुके हैं। आरोप तो यह तक हैं संसाधनों का बड़ा हिस्सा जमीन तक पहुंचने से पहले ही रास्ते में विलुप्त हो रहा, एक ही धुन सुनाई पड़ती बस नारायण…नारायण!
फर्रूखाबाद जिसे कभी अपराकाशी की गरिमा से जोड़ा जाता था आज एक अलग ही चर्चा में है, करीब एक दशक बाद खुले तौर पर उठ रहे इन आरोपों ने प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्र खडे कर दिए हैं। जिम्मेदार अधिकारी जहां अपनी छवि बचाने की होड़ में जान तक गवां रहे हैं, वहीं आम जनता बदहाल सडक़ों, अधूरे कार्यो और उपेक्षित सुविधाओं से जूझ रही है।
जमीनी हकीकत यह है कि शिकायतें तो दर्ज हो रहीं है लेकिन कार्यवाही की रफ्तार बेहद धीमी है। नतीजा सिस्टम में बैठे ऐसे कथित नारायण और उनके नंदन बेखौफ होकर अपना तंत्र चला रहे है। सेवा निवृत हो चुके लोग गोपन रिपोर्ट बना रहे हैं, नोटिसों को जारी करा रहे है और वसूली का चंदन पहुंचा रहे हैं। हालात यहां तक पहुंच गये हैं कि सच बताने वाले नारद भी निशाने पर आ गये हैं। लेकिन नारद के नारायण त्रिलोक स्वामी हैं उन्हें कमीशन वाले नारायण की चिंता नहीं, अपराकाशी लुटेगी नही क्योकि एक नारा चला था जो आज भी जिंदा है कि हम फिदा-ए-फर्रूखाबाद, फर्रूखाबाद हम पर फिदा……


