लखनऊ/वाराणसी/प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में भले ही मानसून की रफ्तार फिलहाल धीमी पड़ गई हो, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश ने प्रदेश की नदियों को उफान पर ला दिया है। गंगा, घाघरा-सरयू समेत 10 प्रमुख नदियों के बढ़ते जलस्तर ने कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। बिजनौर में गंगा का पानी बहसूमा-ठाकुरद्वारा राज्य मार्ग के ऊपर से बहने लगा है, जबकि वाराणसी में घाटों की सीढ़ियां जलमग्न हो गई हैं और दर्जनों छोटे मंदिर गंगा की धारा में घिर गए हैं।
बिजनौर के रायपुर खादर और मीरापुर सीकरी क्षेत्र में सैकड़ों बीघा फसल पानी में डूब गई है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। वहीं वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ने के कारण नौकायन पर रोक लगा दी गई है। घाटों के निचले हिस्से पानी में समा गए हैं और कई मंदिरों में पानी भर चुका है।
लखीमपुर खीरी में गुरुवार शाम शारदा नदी में नाव पलटने से बड़ा हादसा हो गया। नाव में सवार 9 लोगों में से 7 को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि 2 युवक तेज धारा में बह गए। उनकी तलाश के लिए राहत और बचाव अभियान जारी है। उधर बरेली के एक शिवभक्त को हरिद्वार में गंगा की तेज धारा से एसडीआरएफ ने सुरक्षित बाहर निकाला।
प्रदेश में शुक्रवार को 39 जिलों में वर्षा दर्ज की गई। सबसे अधिक 39.5 मिलीमीटर बारिश बिजनौर में हुई। मौसम विभाग ने शनिवार को 41 जिलों में बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान मानसूनी तंत्र कमजोर पड़ रहा है, लेकिन 3 से 4 अगस्त के बाद मानसून दोबारा सक्रिय होगा और प्रदेश में व्यापक बारिश का दौर लौट सकता है।
इस बीच उन्नाव में कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे का हिस्सा दूसरी बार धंसने से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। सहारनपुर में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की सर्विस रोड और एप्रोच मार्ग भी बारिश के बीच कई जगह धंस गए हैं।
प्रदेश में बढ़ते जलस्तर और संभावित बारिश को देखते हुए प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों, निचले इलाकों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में पहाड़ों पर बारिश जारी रही तो मैदानी इलाकों में बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है।


