लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय ने प्रशासनिक कामकाज में बड़ा बदलाव करते हुए शुक्रवार से पूरी तरह कागज-मुक्त व्यवस्था लागू कर दी। 69वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने इस नई व्यवस्था का शुभारंभ किया। साथ ही 1 लाख 25 हजार 239 विद्यार्थियों को डिजिटल उपाधियां प्रदान की गईं। विश्वविद्यालय में वर्तमान में 44 देशों के विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं, जबकि इस सत्र में विदेशी विद्यार्थियों के प्रवेश में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
दीक्षांत समारोह में 248 शोधार्थियों को शोध उपाधि तथा 111 मेधावी विद्यार्थियों को कुल 204 पदक प्रदान किए गए। इनमें छात्राओं का दबदबा रहा। कुलपति प्रो. जे.पी. सैनी ने बताया कि विश्वविद्यालय में इस सत्र में हजारों नई सीटें बढ़ाई गई हैं तथा आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता उत्कृष्टता केंद्र के माध्यम से हर वर्ष हजारों विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि सभी प्रशासनिक कार्य पूरी तरह डिजिटल किए जाएं तथा छात्रावास, पुस्तकालय, भोजनालय और अन्य मूलभूत सुविधाओं में सुधार किया जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल उपाधि तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि समाज, संस्कार और राष्ट्र निर्माण से भी जुड़नी चाहिए। उन्होंने दहेज, नशा और महिलाओं के विरुद्ध अपराधों पर चिंता जताते हुए युवाओं से सामाजिक बदलाव में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया।
दीक्षांत समारोह में नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने विद्यार्थियों से नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार देने वाले बनने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बदलते दौर में नई तकनीक, आजीवन सीखने की भावना और नवाचार ही सफलता की सबसे बड़ी कुंजी हैं।


