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Wednesday, April 22, 2026

जर्मनी दौरे पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

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भारत-जर्मनी रिश्तों, प्रवासी भूमिका और वैश्विक मुद्दों पर दिया व्यापक संदेश

नई दिल्ली

जर्मनी के आधिकारिक दौरे पर पहुंचे भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने राजधानी बेर्लिन में भारतीय समुदाय के एक भव्य कार्यक्रम को संबोधित करते हुए भारत-जर्मनी संबंधों, वैश्विक कूटनीति, आर्थिक सहयोग और भारतीय प्रवासियों की भूमिका पर विस्तार से अपने विचार रखे। अपने संबोधन में उन्होंने दोनों देशों के बीच गहराते रिश्तों को नई दिशा देने की बात कही और भारतीय समुदाय को इस संबंध का “लिविंग ब्रिज” बताया।
कार्यक्रम के दौरान रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले सात दशकों में भारत और जर्मनी के संबंध लगातार मजबूत हुए हैं और आज जर्मनी यूरोप में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है। उन्होंने बताया कि भारत में 2,000 से अधिक जर्मन कंपनियां सक्रिय हैं, जो देश के औद्योगिक विकास और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को गति दे रही हैं। वहीं, भारतीय कंपनियां भी जर्मनी में अपने निवेश और उपस्थिति के जरिए आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई दे रही हैं।
रक्षा मंत्री ने भारतीय प्रवासी समुदाय की सराहना करते हुए कहा कि जर्मनी में लगभग 3.7 लाख भारतीय रहते हैं और उनकी मेहनत, प्रतिभा और अनुशासन ने जर्मनी के विकास में अहम योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत और जर्मनी के रिश्ते केवल सरकारों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के नागरिकों के आपसी जुड़ाव से इन संबंधों को वास्तविक मजबूती मिलती है।
अपने संबोधन में उन्होंने भारत की तेज आर्थिक प्रगति का भी उल्लेख किया और कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टार्टअप, अंतरिक्ष और डिजिटल इनोवेशन के क्षेत्र में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2026 भारत और जर्मनी के लिए विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इस वर्ष दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और आपसी विश्वास पर आधारित हैं।
इस दौरान रक्षा मंत्री ने रबिन्द्रनाथ टैगोर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बर्लिन स्थित हम्बोल्ट विश्वविद्यालय में उनकी प्रतिमा पर पुष्प चढ़ाए और भारत-जर्मनी के सांस्कृतिक संबंधों की गहराई को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच केवल रणनीतिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और बौद्धिक जुड़ाव भी बेहद मजबूत है।
कार्यक्रम के दौरान हल्के-फुल्के अंदाज में उन्होंने अपनी पहली जर्मनी यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि वह अमेरिका कई बार जा चुके हैं, जिस पर श्रोताओं के बीच हंसी का माहौल बन गया। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि वह सभी से मिलकर बेहद प्रसन्न हैं।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव पर बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि वहां की स्थिति पर भारत सरकार लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि विदेशों में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए सरकार ने आवश्यक कदम उठाए हैं और जरूरतमंद लोग संबंधित दूतावासों से संपर्क कर सकते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि किसी भी भारतीय नागरिक की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जाएगा।
ऊर्जा और कच्चे तेल की आपूर्ति को लेकर उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया के हालात का भारत पर फिलहाल सीमित प्रभाव पड़ा है और देश में आवश्यक संसाधनों का पर्याप्त भंडार मौजूद है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री के निर्देश पर एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया है, जिसकी अध्यक्षता वह स्वयं कर रहे हैं और यह समिति लगातार स्थिति की समीक्षा कर रही है।
अपने संबोधन के अंत में रक्षा मंत्री ने जर्मनी की वैश्विक प्रतिष्ठा की सराहना करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर जर्मनी का विशेष स्थान है और इसमें वहां के नागरिकों के साथ-साथ भारतीय समुदाय का भी महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारत और जर्मनी के संबंध और अधिक मजबूत होंगे और दोनों देश मिलकर वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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