प्रो. एच. एन शर्मा
“जिन हाथों में शक्ति है राजतिलक देने की, उन्हीं हाथों में शक्ति है सर उतार देने की।”
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और “युवा तुर्क” के नाम से प्रसिद्ध चंद्रशेखर का यह कथन आज भी भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी सच्चाइयों में से एक माना जाता है। लोकतंत्र में अंतिम शक्ति किसी सरकार, दल या नेता के पास नहीं, बल्कि जनता के पास होती है और उस जनता की सबसे बड़ी ताकत देश का युवा वर्ग है।
भारत आज विश्व का सबसे युवा देशों में शामिल है। देश की लगभग 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है, जबकि करीब 50 प्रतिशत आबादी 25 वर्ष से कम आयु की है। यही युवा शक्ति भारत की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक और विकासात्मक पूंजी है। यही कारण है कि जब युवाओं की आवाज़ संगठित होकर उठती है, तो सत्ता को भी उसे सुनना पड़ता है।
हाल के घटनाक्रम में केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा स्वीकार करना केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे युवाओं की भावनाओं और लोकतांत्रिक दबाव का सम्मान करने वाले कदम के रूप में भी देखा जा रहा है। सरकार ने इसके साथ ही शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और आवश्यक कानूनी बदलावों पर आगे बढ़ने के संकेत दिए हैं। यह संदेश महत्वपूर्ण है कि लोकतंत्र में संवाद, संवेदनशीलता और जवाबदेही समान रूप से आवश्यक हैं।
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर को “युवा तुर्क” इसलिए कहा गया क्योंकि उन्होंने सत्ता से अधिक महत्व सिद्धांतों, लोकतांत्रिक मूल्यों और युवाओं की आकांक्षाओं को दिया। उनका विश्वास था कि यदि देश के युवाओं को न्याय, अवसर और सम्मान मिलेगा तो भारत विश्व का नेतृत्व कर सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी अनेक अवसरों पर यह कह चुके हैं कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका युवा वर्ग है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, डिजिटल शिक्षा, स्टार्टअप इंडिया, स्किल इंडिया, प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और नवाचार को बढ़ावा देने वाली अनेक योजनाएं इसी सोच का हिस्सा हैं। यदि शिक्षा व्यवस्था में सुधार और परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाते हैं तो यह करोड़ों युवाओं के भविष्य को मजबूत करने वाला निर्णय होगा।
भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अवसर, समान अधिकार और न्याय का भरोसा देता है। डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान निर्माण के समय अवसर की समानता को लोकतंत्र की आधारशिला माना था। महात्मा गांधी ने जनमत को सर्वोच्च बताया, जबकि लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने युवाओं को सामाजिक परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम माना। इन महान विचारकों की लोकतांत्रिक परंपरा यही कहती है कि सरकारें जनता की होती हैं और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप निर्णय लेना ही लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति है।
आज आवश्यकता केवल किसी एक निर्णय पर उत्सव मनाने की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करने की है जिसमें किसी भी छात्र का भविष्य परीक्षा अनियमितताओं, भ्रष्टाचार या प्रशासनिक लापरवाही से प्रभावित न हो। शिक्षा व्यवस्था जितनी पारदर्शी होगी, राष्ट्र उतना ही मजबूत होगा।
चंद्रशेखर का वह ऐतिहासिक कथन आज भी उतना ही प्रासंगिक है,राजतिलक करने वाली जनता ही लोकतंत्र में अंतिम निर्णायक होती है। सरकारें आती-जाती हैं, लेकिन लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति सदैव जागरूक नागरिक और युवा वर्ग ही रहेगा। जब युवा जागता है, तब केवल सरकारें नहीं, बल्कि व्यवस्था भी बदलती है। यही भारत के लोकतंत्र की सबसे बड़ी पहचान और सबसे बड़ी ताकत है।
लेखक स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के राजनीतिक सलाहकार रहे हैं।
युवा शक्ति के आगे झुकी सत्ता लोकतंत्र में युवाओं की आवाज़ का हुआ सम्मान


