13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने की जांच की गुहार
नई दिल्ली। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की ओर से दाखिल याचिका में पुनरीक्षण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।
याचिका में दावा किया गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान करीब 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। याचिकाकर्ता ने इन नामों को हटाए जाने की प्रक्रिया की विशेष जांच दल से जांच कराने की मांग की है। साथ ही मतदाता सूची और उससे जुड़े आंकड़ों के प्रबंधन की भी जांच की मांग उठाई गई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े कुछ फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। इसमें मतदाता पंजीकरण से जुड़े प्रपत्र संख्या छह में बदलाव का मामला भी शामिल है। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस बदलाव को लेकर चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आपत्ति जताई थी।
याचिका में समाचार रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा गया है कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कई मौकों पर आपत्ति दर्ज कराई थी। याचिकाकर्ता ने ऐसे फैसलों को कानून के अनुरूप न होने का दावा करते हुए उन्हें निरस्त करने की मांग की है।
मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग, सूचना प्रौद्योगिकी महानिदेशक सीमा खन्ना तथा कथित रूप से जिम्मेदार अन्य अधिकारियों के खिलाफ जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत कार्रवाई की मांग भी की गई है।
हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोपों पर अभी न्यायालय का फैसला नहीं आया है। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़े फैसलों को लेकर अलग पक्ष रखा गया है। अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर निगाहें टिकी हैं।


