आठ आरोपी, चंपत राय समेत तीन ट्रस्ट पदाधिकारी बने गवाह
अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में पुलिस ने अदालत में 73,480 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है। जांच में मंदिर परिसर के सीसीटीवी कैमरों में चढ़ावे की रकम से जुड़ी 105 घटनाएं दर्ज होने, 173 गवाहों के बयान और बड़ी संख्या में दस्तावेजी व डिजिटल साक्ष्य जुटाए जाने की बात सामने आई है। मामले में आठ लोगों को आरोपी बनाया गया है।
पुलिस की जांच के मुताबिक चढ़ावे की रकम तक किसी बाहरी व्यक्ति की पहुंच नहीं थी। आरोप-पत्र में गणना और नोटों की छंटाई से जुड़े कर्मचारियों पर ही रकम में हेराफेरी के आरोप लगाए गए हैं। जांच में सीसीटीवी फुटेज के साथ मोबाइल संदेश, कॉल विवरण, बैंक खातों में नकद जमा, संपत्ति खरीद और बरामदगी को भी साक्ष्य का हिस्सा बनाया गया है। पुलिस ने अलग-अलग आरोपियों की भूमिका सीसीटीवी फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों से जोड़ने का दावा किया है।
मामले में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, अविनाश शुक्ल और सेवानिवृत्त बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव को आरोपी बनाया गया है। पुलिस के अनुसार जांच में कुछ आरोपियों के बैंक खातों में नकद जमा, जमीन-मकान, वाहन, आभूषण और अन्य संपत्तियों से जुड़े लेन-देन की भी पड़ताल की गई। आरोप-पत्र में इन संपत्तियों को कथित चोरी की रकम से जोड़ने का दावा किया गया है।
जांच में अविनाश शुक्ला के सीसीटीवी में कई बार चढ़ावे की रकम हटाने का आरोप लगाया गया है। इसी तरह लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडेय और अन्य आरोपियों की भूमिका को भी अलग-अलग घटनाओं और डिजिटल साक्ष्यों से जोड़ने की बात कही गई है। पुलिस ने जांच के दौरान नकदी, वाहन और अन्य सामान की बरामदगी का भी उल्लेख किया है। हालांकि इन सभी आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत में साक्ष्यों और सुनवाई के बाद होगा।
चार्जशीट का एक अहम पहलू यह है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र और व्यवस्था से जुड़े गोपाल राव को आरोपी नहीं बनाया गया है। उन्हें मामले में गवाह के रूप में शामिल किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार पुलिस ने ट्रस्ट और बैंककर्मियों की भूमिका को लेकर भी अपनी जांच में निष्कर्ष दर्ज किए हैं।
इस मामले में अब जांच के तरीके और आरोप-पत्र के दायरे को लेकर भी सवाल उठे हैं। पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर ने 105 घटनाओं के सामने आने के बावजूद केवल आठ लोगों को आरोपी बनाए जाने पर सवाल उठाते हुए आगे की जांच की मांग की है। दूसरी ओर पुलिस का आरोप-पत्र अब अदालत के समक्ष है और मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ेगी।


