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Saturday, May 30, 2026

चंदौली प्रकरण पर सियासत तेज, बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का सपा पर हमला

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– बोले पीडीए और महिला सम्मान का नारा देने वाली सपा का यें नया संस्करण
– साबित हो गया सपा में गुंडई अपनी पार्टी में ही

लखनऊ/चंदौली। चंदौली में समाजवादी पार्टी की महिला जिलाध्यक्ष से जुड़े कथित मारपीट प्रकरण को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस मामले को लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए समाजवादी पार्टी पर महिला सम्मान को लेकर दोहरा चरित्र अपनाने का आरोप लगाया है।

पंकज चौधरी ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि समाजवादी पार्टी का पीडीए अब “पीड़ा, दमन और अपमान” का नया संस्करण बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस पार्टी के मंचों से महिला सम्मान, सामाजिक न्याय और अधिकारों की बातें की जाती हैं, उसी पार्टी की महिला पदाधिकारी के साथ कथित रूप से मारपीट की घटना बेहद गंभीर और चिंताजनक है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि यदि अपनी ही पार्टी की महिला जिलाध्यक्ष सुरक्षित नहीं हैं तो महिला सम्मान के दावों की वास्तविकता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला सम्मान का मुद्दा केवल भाषणों और पोस्टरों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि संगठन के भीतर भी उसका पालन होना चाहिए।
पोस्ट में उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश की महिलाएं राजनीतिक दलों के चाल, चरित्र और चेहरे को भली-भांति पहचानती हैं। साथ ही उन्होंने “#सत्ताइस_में_सपा_साफ” हैशटैग का इस्तेमाल करते हुए आगामी विधानसभा चुनावों की ओर भी संकेत किया।
उधर, चंदौली में सामने आए कथित विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा इस मुद्दे को महिला सम्मान और कानून व्यवस्था से जोड़कर उठा रही है, जबकि समाजवादी पार्टी की ओर से मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला सुरक्षा और सम्मान जैसे मुद्दे उत्तर प्रदेश की राजनीति में हमेशा संवेदनशील रहे हैं। ऐसे में चंदौली का यह प्रकरण आने वाले दिनों में प्रदेश की सियासत में बड़ा मुद्दा बन सकता है।
चंदौली का विवाद अब केवल एक संगठनात्मक मामला नहीं रह गया है, बल्कि महिला सम्मान, राजनीतिक नैतिकता और दलों के आंतरिक आचरण को लेकर व्यापक राजनीतिक बहस का रूप लेता दिखाई दे रहा है। हालांकि मामले के सभी तथ्यों और आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही अंतिम निष्कर्ष सामने आएगा।

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