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Monday, April 27, 2026

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और एटीएफ टैक्स को लेकर एनसीआर में बढ़ी हलचल

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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर एयरपोर्ट) के लॉन्च के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में एयर टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर वैट को लेकर बड़ा विवाद और चर्चा तेज हो गई है। दिल्ली और उत्तर प्रदेश के बीच एटीएफ पर लगने वाले टैक्स में भारी अंतर ने विमानन उद्योग का ध्यान खींचा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अंतर भविष्य में उड़ानों के संचालन, ईंधन भरने की रणनीति और एयरलाइंस के रूट प्लानिंग को गहराई से प्रभावित कर सकता है।

विमानन क्षेत्र में ईंधन यानी एटीएफ की लागत कुल परिचालन खर्च का लगभग 40 प्रतिशत तक होती है, इसलिए टैक्स में मामूली बदलाव भी एयरलाइंस के लिए बड़ा आर्थिक फर्क पैदा करता है। वर्तमान में दिल्ली में एटीएफ पर करीब 25 प्रतिशत वैट लगता है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह केवल 1 प्रतिशत है। इस कारण यूपी में ईंधन भरवाना दिल्ली की तुलना में काफी सस्ता पड़ता है, जिससे एयरलाइंस का रुझान जेवर एयरपोर्ट की ओर बढ़ सकता है।

उदाहरण के तौर पर, दिल्ली में एटीएफ की कीमत लगभग 96,000 रुपये प्रति किलोलीटर तक पहुंच जाती है, जबकि यूपी में यह करीब 80,164 रुपये प्रति किलोलीटर है। टैक्स जोड़ने के बाद दोनों जगहों की लागत में बड़ा अंतर आ जाता है। एक अनुमान के अनुसार, एक सामान्य उड़ान में करीब 3 किलोलीटर ईंधन खर्च होता है, जिससे दिल्ली से उड़ान भरने पर एयरलाइंस को प्रति उड़ान लगभग 70 हजार रुपये से अधिक का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है। यही अंतर लंबे समय में करोड़ों रुपये की बचत या नुकसान में बदल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस लागत अंतर का असर एनसीआर में एयर ट्रैफिक के संतुलन पर भी पड़ सकता है। कम टैक्स और कम परिचालन लागत वाले एयरपोर्ट अधिक एयरलाइंस और उड़ानों को आकर्षित करते हैं। ऐसे में जेवर एयरपोर्ट भविष्य में दिल्ली एयरपोर्ट के लिए मजबूत प्रतिस्पर्धी बन सकता है। इससे यात्रियों का ट्रैफिक और एयरलाइंस का नेटवर्क भी धीरे-धीरे शिफ्ट होने की संभावना जताई जा रही है।

राज्य सरकार के अनुसार, यूपी ने एयर कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने के लिए एटीएफ पर वैट को घटाकर सिर्फ 1 प्रतिशत कर दिया है और रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम पर 2027 तक वैट समाप्त करने की योजना है। इस कदम को जेवर एयरपोर्ट के लिए एक बड़ा “गेमचेंजर” माना जा रहा है। वहीं, दिल्ली और अन्य राज्यों में अलग-अलग वैट दरें होने से पूरे क्षेत्र में नीति स्तर पर समानता को लेकर बहस तेज हो गई है।

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