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Tuesday, April 21, 2026
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जयंती पर ब्राह्मण समाज ने भगवान परशुराम को किया नमन

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फर्रुखाबाद। भगवान परशुराम जयंती की रविवार को नगर में में धूम रही। ब्राह्मण समाज सेवा समिति ने सुबह ब्राह्मण समाज धर्मशाला में हवन यज्ञ व विचार गोष्ठी का आयोजन किया।वहीं दूसरी ओर ब्राह्मण समाज जन सेवा समिति के बैनर तले साधु संतों के संरक्षण में बद्री विशाल डिग्री कॉलेज में कार्यक्रम हुआ।

ब्राह्मण समाज सेवा समिति की शोभा यात्रा संयोजक एवं अन्य जिम्मेदार घर-घर जाकर कार्यक्रम को सफल बनाने की भूमिका बनाई थी।

ब्राह्मण समाज सेवा समिति के अध्यक्ष रमेश चंद्र त्रिपाठी, महामंत्री लाला राम दुबे , सदानंद शुक्ला, राजू गौतम, कैलाश मिश्रा, अभिषेक त्रिवेदी, कृष्णकांत त्रिपाठी अक्षर विनोद अग्निहोत्री दीक्षित समाज के दर्जनों लोगों ने मौजूद रहकर हवन यज्ञ में आहुतियां दीं व भगवान परशुराम से प्रेरणा लेने का संकल्प दोहराया। इस मौके पर भी गोष्ठी में ब्राह्मण समाज सेवा समिति के अध्यक्ष रमेश चंद्र त्रिपाठी ने कहा कि भगवान परशुराम किसी समाज विशेष के विरोधी नहीं हैं बल्कि अत्याचारियों का अंत करने के लिए संकल्पबध्द रहे । अगर ऐसा ना होता तो क्षत्रियों से सत्ता छीन कर क्षत्रियों को भी वापस क्यों कर देते। इस अवसर पर समाज के प्रमुख लोगों ने विचार किये।

शोभा यात्रा संयोजक सौरभ मिश्रा ने बताया कि शोभायात्रा अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर रविवार को शाम 5 बजे पंडा बाग मंदिर से शोभा यात्रा प्रारंभ प्रारंभ होकर ब्राह्मण समाज धर्मशाला तक निकाली जाएगी। उन्होंने ब्राह्मण समाज के सभी लोगों से यात्रा में भागीदारी करने की अपील की है।
वहीं दूसरी ओर ब्राह्मण जन सेवा समिति के तत्वावधान में ही बद्री विशाल डिग्री कॉलेज में हवन , पूजन, विचार गोष्ठी भंडारा इत्यादि होगा जिसमें संत समाज की मौजूदगी रही इसके लिए संस्था के संस्थापक नारायण दत्त द्विवेदी महिला अध्यक्ष प्रीति पवन तिवारी व अन्य पदाधिकारी तैयारी में जुटे हुए हैं। नारायण दत्त द्विवेदी ने बताया कि सुबह 10:00 बजे से हवन पूजन हुआ विचार गोष्ठी हुए और भंडारा व प्रसाद वितरण हुआ ।इस दौरान ईश्वर दास ब्रह्मचारी महाराज ,ओमकार दास ब्रह्मचारी महाराज कमल लोचन महाराज आदि पूजा अर्चना कराया।

नाबालिग बेटी संग दरिंदगी से दुष्कर्म, थाना जहानगंज पुलिस नें नहीं की कार्यवाही

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– हल्का इंचार्ज पर आरोपी के पिता को हिरासत में ले कर वरी करने का आरोप
– घटना के बाद नहीं की कोई कार्यवाही,
– पुलिस अधीक्षक से पीड़िता और उसकी विधवा मां ने लगाई न्याय की गुहार

यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद/ जहानगंज। थाना क्षेत्र के एक चर्चित गांव में शर्मसार कर देने वाली घटना को अंजाम देकर दरिंदे ने बगैर पिता की नाबालिक बेटी साथ जबरिया दुष्कर्म की घटना को अंजाम दे दिया चौंकाने वाली बात तो तब सामने आई जब पुलिस ने पूरे मामले का संज्ञान लेने के बाद आरोपी के पिता को हिरासत में लेने के बाद न केवल छोड़ दिया बल्कि मुकदमा तक लिखने की जरूरत नहीं समझी पीडि़ता के चाचा से मनचाही तहरीर पर हस्ताक्षर करवा लिए, पीडि़त बेटी की बिधवा मां ने पुलिस अधीक्षक आरती सिंह से इंसाफ की गुहार लगाई है। इस घटना नें न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि पुलिस की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में ला खड़ा किया है। विधवा महिला ने अपनी 13 वर्षीय नाबालिग बेटी के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में थाना पुलिस पर लीपापोती और आरोपी को बचाने का गंभीर आरोप लगाया है।
पीडि़ता की बिधवा माँ रानी देवी (काल्पनिक नाम), निवासी थाना क्षेत्र के अनुसार, 18 अप्रैल 2026 की रात करीब 8:30 बजे उनकी नाबालिग पुत्री, जो कक्षा 8 की छात्रा है, को गांव के ही एक युवक प्रतीक ने बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। परिजन जब बच्ची के देर तक घर न लौटने पर चिंतित हुए तो तलाश शुरू की गई। मोबाइल कॉल डिटेल खंगालने पर अंतिम कॉल आरोपी की मिली, जिससे संदेह गहराया।
आरोप है कि रात करीब 1:30 बजे बच्ची वापस मिली, लेकिन उसकी हालत बेहद खराब थी, कपड़े फटे हुए, मानसिक रूप से सहमी हुई। पीडि़ता ने परिजनों को बताया कि आरोपी उसे गांव के पास स्थित पानी की टंकी के पास ले गया और वहां उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया। साथ ही जान से मारने की धमकी भी दी गई।
मामले की गंभीरता यहीं खत्म नहीं होती। पीडि़ता की मां का आरोप है कि सूचना देने के बावजूद थाना जहानगंज पुलिस ने न तो तत्काल एफआईआर दर्ज की और न ही विधिक कार्रवाई की। उल्टा, उनके देवर से जबरन अपनी भाषा में प्रार्थना पत्र लिखवाकर हस्ताक्षर करा लिए गए। कई घंटे बीत जाने के बाद भी मुकदमा दर्ज नहीं किया गया, जो पुलिस की संवेदनहीनता को उजागर करता है।
सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि आरोपी के पिता को पुलिस ने हिरासत में लेने के बाद कथित रूप से मोटी रकम लेकर छोड़ दिया। यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह केवल एक आपराधिक लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर भ्रष्टाचार और न्याय प्रक्रिया से खिलवाड़ का मामला बनता है। पीडि़ता पक्ष ने थाने और आरोपी के घर के सीसीटीवी फुटेज जांच की मांग भी की है, जिससे सच्चाई सामने आ सके।
बताया जा रहा है कि आरोपी का परिवार आर्थिक रूप से मजबूत है और स्थानीय स्तर पर प्रभाव रखता है, जिसके चलते पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई करने से बच रही है। यही कारण है कि अब पीडि़ता परिवार ने सीधे पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाई है।
प्रार्थना पत्र में स्पष्ट मांग की गई है कि तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए, पीडि़ता का मेडिकल परीक्षण कराया जाए, और पूरे मामले की जांच किसी अन्य थाना या विशेष टीम से कराई जाए। साथ ही थाना जहानगंज के संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच कर सख्त कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है।

नारी शक्ति का नया सवेरा नुक्कड़ नाटक से भारतेन्दु नाट्य अकादमी ने किया जागरूक

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फर्रुखाबाद। नारी वंदन अधिनियम पर आधारित भारतेन्दु नाट्य अकादमी ने महिलाओं के सम्मान, अधिकार और सशक्तिकरण को केंद्र में रखते नगर में में 4 स्थानों पर ” नारी शक्ति का नया सवेरा ” नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया।
शहर के प्रमुख सार्वजनिक स्थल पटेल पार्क, बढपुर देवी मन्दिर, ग्राम नगला खुरू एवं गुरुग्राम देवी मन्दिर पर आयोजित की गई, जहां बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।
नुक्कड़ नाटक के माध्यम से कलाकारों ने महिलाओं के पिछले 70 वर्षों में देश के अन्दर की स्थिति को प्रदर्शित किया।महिला आरक्षण के माध्यम से समाज का प्रतिनिधित्व महिलाएं भी कर सकेंगी । नाटक ने यह संदेश दिया कि नारी केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि वह हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही है और समाज की प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
प्रस्तुति का सबसे प्रभावशाली दृश्य वह रहा जिसमें एक महिला पात्र संघर्षों का सामना करते हुए आत्मनिर्भर बनती है और समाज में अपनी अलग पहचान स्थापित करती है। कलाकारों के जीवंत अभिनय और प्रभावशाली संवादों ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया तथा उन्हें सोचने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों से महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का आह्वान किया गया। दर्शकों ने जोरदार तालियों के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और नाटक की सराहना की।
नाटक के दौरान अमित सक्सेना, धीरज मौर्या, सर्वेश श्रीवास्तव, विशाल श्रीवास्तव. शिवानी, सत्या भारतेन्दु नाट्य अकादमी के सदस्य सुरेन्द्र पाण्डेय सहित अनेक दर्शक उपस्थित रहे।

बिना स्वीकृति 11 केवी लाइन शिफ्ट करने का मामला उजागर, जेई निलंबित—विभाग में मचा हड़कंप

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फर्रुखाबाद। जनपद के ग्राम नेकपुर खुर्द में विद्युत विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए तत्काल कार्रवाई की है। बिना स्वीकृत एस्टीमेट और तकनीकी अनुमति के 11 केवी विद्युत लाइन को शिफ्ट किए जाने के मामले में प्रभारी अवर अभियंता (जेई) रमेश कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई से विभाग में हड़कंप मच गया है और अन्य कर्मचारियों में भी खलबली देखी जा रही है।
मामला उस समय प्रकाश में आया जब खेत के बीच से गुजर रही 11 केवी लाइन को बिना किसी आधिकारिक अनुमति के किनारे स्थानांतरित कर दिया गया। जिलाधिकारी के निर्देश पर हुए स्थलीय निरीक्षण में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। जांच टीम ने पाया कि विद्युत पोल को जल्दबाजी में उखाड़कर किनारे स्थापित किया गया था। मौके पर खुदाई के स्पष्ट निशान मिले, जबकि खेत का अन्य हिस्सा सामान्य स्थिति में पाया गया।
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि लाइन के एक फेज पोल की अर्थिंग पूरी तरह से टूटी हुई थी और तार जमीन के काफी नजदीक झूल रहा था, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता था। पोल पर लगा स्टे वायर भी टूटा हुआ मिला, जिसका एक सिरा जमीन पर लटक रहा था। इसके अलावा नजदीक से गुजर रही फोन लाइन भी बेहद खतरनाक दूरी पर पाई गई, जो दुर्घटना की आशंका को और बढ़ा रही थी।
जब इस संबंध में प्रभारी जेई रमेश कुमार से नोटिस, स्वीकृति या शिफ्टिंग प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी मांगी गई तो वह कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। उन्होंने केवल अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की बात कही, लेकिन विभागीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई थी।
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि बिना एस्टीमेट और अनुमोदन के लाइन शिफ्ट करने से विभाग को राजस्व हानि हुई है। इसके अलावा विभागीय सामग्री के नुकसान की भी अनदेखी की गई और उसकी भरपाई के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया। अधिकारियों ने पाया कि संबंधित जेई अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर रूप से लापरवाह रहे और अधीनस्थ कर्मचारियों पर उनका नियंत्रण भी प्रभावी नहीं था।
बार-बार चेतावनी और निर्देश दिए जाने के बावजूद कार्यप्रणाली में सुधार न होने के चलते अधीक्षण अभियंता यादवेन्द्र सिंह ने कड़ा कदम उठाते हुए जेई रमेश कुमार को निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें अधिशासी अभियंता, विद्युत वितरण खंड कायमगंज कार्यालय से संबद्ध किया गया है और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
विभाग ने संकेत दिए हैं कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और इसमें शामिल अन्य कर्मियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। दोषी पाए जाने पर उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह पूरा प्रकरण विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है और भविष्य में ऐसी लापरवाही रोकने के लिए सख्त निगरानी की आवश्यकता को दर्शाता है।

गांव में अपना काम- धंधा शुरू करने के लिए मिलेगा 10 लाख रुपये तक का  ऋण

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– मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना’ के तहत युवाओं को दिया जा रहा सुनहरा मौका

– महिलाओं और आरक्षित वर्ग को शून्य प्रतिशत ब्याज पर मिलेगा ऋण

आगरा, 17 अप्रैल। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दूर करने और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उत्तर प्रदेश की योगी सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राज्य पोषित ‘मुख्यमंत्री ग्रामोद्योग रोजगार योजना’ के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र में स्वरोजगार और इकाइयां स्थापित करने के लिए युवक- युवतियों को अधिकतम 10 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है।

18 से 50 वर्ष के युवा उठा सकते हैं लाभ
इस जनकल्याणकारी योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और अधिकतम आयु 50 वर्ष होनी चाहिए। जनपद आगरा के ग्रामीण क्षेत्रों में निवास करने वाला कोई भी व्यक्ति, जो अपना नया उद्योग लगाना चाहता है या सेवा क्षेत्र से जुड़ा कोई भी कार्य शुरू करना चाहता है, वह इस योजना का लाभ उठाकर अपने सपनों को उड़ान दे सकता है।

महिलाओं और आरक्षित वर्ग को ब्याज में भारी छूट
योगी सरकार ने इस योजना में समाज के हर जरूरतमंद वर्ग का विशेष ध्यान रखा है। योजना के प्रावधानों के अनुसार, स्वीकृत पूंजीगत ऋण पर सामान्य श्रेणी के पुरुष आवेदकों को बैंक द्वारा निर्धारित ब्याज में से स्वयं केवल 4 प्रतिशत ब्याज का वहन करना होगा। वहीं अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, महिलाओं, दिव्यांगों और भूतपूर्व सैनिकों को इस योजना के अंतर्गत पूंजीगत ऋण पर शून्य प्रतिशत (0%) ब्याज देना होगा।

ऑनलाइन करें आवेदन
इच्छुक आवेदक सीधे ऑनलाइन पोर्टल (https://mmgrykhadi.upsdc.gov.in) पर जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। आवेदन करते समय आवेदक के पास आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, शैक्षिक व तकनीकी योग्यता प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो) और एक नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटो होना अनिवार्य है। ऑनलाइन आए आवेदनों की पहले स्कोरकार्ड के जरिए निष्पक्ष जांच की जाएगी और फिर चयनित फाइलें बैंकों को भेजी जाएंगी।

जिला ग्रामोद्योग अधिकारी नीतू यादव ने बताया कि योगी सरकार की मंशा के अनुरूप ग्रामीण युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए यह योजना बेहद लाभकारी है। वित्तीय वर्ष 2026- 27 के लक्ष्य के अनुरूप हमने आवेदन आमंत्रित किए हैं। हमारी कोशिश है कि अधिक से अधिक जरूरतमंद इस योजना का लाभ उठाकर आत्मनिर्भर बनें। ऑनलाइन प्रक्रिया होने से पूरी पारदर्शिता बरती जा रही है। किसी भी तरह की जानकारी या सहायता के लिए युवा 59 नारायण विहार कॉलोनी, पश्चिम पुरी, सिकंदरा स्थित जिला ग्रामोद्योग कार्यालय में संपर्क कर सकते हैं।

यूपीएससी चयन प्रक्रिया में भाषा, मूल्यांकन और सभी वर्गों को मिले प्रतिनिधित्व

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– अनूप मिश्रा
देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा में चयन के लिए आयोजित संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हालिया परिणामों और उससे जुड़े तथ्यों का विश्लेषण यह संकेत देता है कि चयन प्रक्रिया में कई स्तरों पर ऐसी खामियां मौजूद हैं, जो प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों के साथ न्याय नहीं कर पा रहीं।
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि वर्ष 2024 की परीक्षा में कुछ अभ्यर्थियों ने ऐसे विकल्पों और माध्यमों का चयन किया, जिनसे उन्हें असामान्य लाभ मिला। खासतौर पर इंडियन फॉरेस्ट सर्विस और भारतीय पुलिस सेवा से जुड़े मामलों में यह बात सामने आई कि कुछ उम्मीदवारों ने अपने मूल विषयों के बजाय दूसरे विकल्प चुनकर अंक अर्जित किए, जिससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा पर प्रश्नचिह्न लगा।
पिछले वर्षों के परिणामों का तुलनात्मक अध्ययन बताता है कि परीक्षा के मूल्यांकन और साक्षात्कार प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी रही है। कई मामलों में अभ्यर्थियों को अपेक्षाकृत कम अंक देकर पीछे कर दिया गया, जबकि कुछ को औसत प्रदर्शन के बावजूद उच्च स्थान मिल गया। यह असंतुलन चयन प्रणाली की विश्वसनीयता को सीधे प्रभावित करता है।
भाषा का मुद्दा भी लगातार विवाद का कारण बन रहा है। आंकड़े बताते हैं कि अंग्रेजी माध्यम के अभ्यर्थियों को मूल्यांकन में बढ़त मिलती है, जबकि भारतीय भाषाओं में परीक्षा देने वाले अभ्यर्थियों को अपेक्षाकृत कम अंक प्राप्त होते हैं। मुख्य लिखित परीक्षा 1750 अंकों की होती है, जिसमें इंटरव्यू के 275 अंक जोड़कर अंतिम मेरिट बनाई जाती है। ऐसे में इंटरव्यू में दिए गए अंक निर्णायक भूमिका निभाते हैं, और यहीं सबसे अधिक असमानता के आरोप सामने आते हैं।
इस बार के परिणामों में यह भी देखने को मिला कि कई अभ्यर्थियों ने लिखित परीक्षा में 50 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए, लेकिन इंटरव्यू में अपेक्षाकृत कम अंक मिलने के कारण वे अंतिम सूची से बाहर हो गए। वहीं कुछ अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में 95 प्रतिशत तक अंक दिए जाने के उदाहरण भी सामने आए, जिसने चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इंटरव्यू बोर्ड की संरचना में विविधता का अभाव भी इस असंतुलन की एक बड़ी वजह है। यदि चयन प्रक्रिया में सभी वर्गों, क्षेत्रों और सामाजिक पृष्ठभूमियों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाए, तो भेदभाव की आशंका को काफी हद तक समाप्त किया जा सकता है। इंटरव्यू लेने वाली टीम में व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना समय की मांग बन चुका है, ताकि हर अभ्यर्थी को उसकी मेहनत के आधार पर निष्पक्ष मूल्यांकन मिल सके।
एक और महत्वपूर्ण मुद्दा पाठ्यक्रम से जुड़ा है। हाल के वर्षों में कुछ वैकल्पिक विषयों और अध्ययन क्षेत्रों को शामिल करने को लेकर भी विवाद हुआ है। इस संदर्भ में यह स्पष्ट रूप से सामने आ रहा है कि किसी एक धार्मिक या वैचारिक अध्ययन, जैसे इस्लामिक शिक्षा स्टडी को विशेष रूप से बढ़ावा देना, परीक्षा की तटस्थता के सिद्धांत के विपरीत है। सिविल सेवा परीक्षा का स्वरूप पूरी तरह धर्मनिरपेक्ष और संतुलित होना चाहिए, जिसमें किसी भी विशेष विचारधारा या धार्मिक अध्ययन को प्राथमिकता न दी जाए।
इतिहास बताता है कि प्रशासनिक सेवाओं के लिए चयन प्रक्रिया में निरंतर सुधार की आवश्यकता होती है। वर्ष 1979 की कोठारी समिति की सिफारिशों के आधार पर जो ढांचा तैयार किया गया था, वह आज बदलते सामाजिक और शैक्षणिक परिदृश्य के अनुरूप पूरी तरह प्रासंगिक नहीं रह गया है। ऐसे में समय-समय पर इसकी समीक्षा और सुधार अनिवार्य है।
विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित वर्गों के अभ्यर्थियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करना आज की सबसे बड़ी जरूरत है। दिल्ली जैसे शहरी केंद्रों में कोचिंग और संसाधनों की उपलब्धता के कारण वहां के अभ्यर्थियों को बढ़त मिलती है, जबकि छोटे शहरों और गांवों के प्रतिभाशाली छात्र पीछे रह जाते हैं। यह असंतुलन देश की प्रशासनिक संरचना में भी असमानता को जन्म देता है।
साफ है कि यदि सिविल सेवा जैसी महत्वपूर्ण परीक्षा में पारदर्शिता, समान अवसर और निष्पक्षता को मजबूत नहीं किया गया, तो यह व्यवस्था अपने मूल उद्देश्य से भटक सकती है। जरूरत इस बात की है कि चयन प्रक्रिया को पूरी तरह संतुलित, पारदर्शी और समावेशी बनाया जाए, ताकि देश को वास्तविक अर्थों में योग्य और निष्पक्ष प्रशासनिक अधिकारी मिल सकें।
लेखक -मेंबर ऑफ़ पार्लियामेंट के सहायक और सलाहकार भी हैँ।