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Tuesday, April 21, 2026
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नोएडा हिंसा का मास्टरमाइंड सॉफ्टवेयर इंजीनियर तमिलनाडु से गिरफ्तार, बड़ा नेटवर्क उजागर

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नोएडा
औद्योगिक क्षेत्रों में 13 अप्रैल को हुए श्रमिक प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ के मामले में पुलिस और एसटीएफ को बड़ी सफलता मिली है। इस मामले के कथित मास्टरमाइंड 28 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य आनंद उर्फ रस्टी को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया गया है, जिससे पूरे प्रकरण में नए खुलासों की उम्मीद बढ़ गई है।

आरोपी आदित्य आनंद मूल रूप से बिहार के हाजीपुर का रहने वाला है और उसने एनआईटी जमशेदपुर से बीटेक की पढ़ाई की थी। कैंपस प्लेसमेंट के जरिए उसे नोएडा की एक एमएनसी में नौकरी मिली थी, जिसके बाद वह बाद में गुरुग्राम और फिर नोएडा में रह रहा था। जांच में पता चला है कि वह लंबे समय से श्रमिक संगठनों और आंदोलनों से जुड़ा हुआ था।

पुलिस के अनुसार, 30 मार्च से 1 अप्रैल के बीच नोएडा स्थित उसके फ्लैट पर कई अहम बैठकें हुई थीं, जिनमें अलग-अलग मजदूर संगठनों के सदस्य शामिल हुए थे। इन्हीं बैठकों में कथित तौर पर प्रदर्शन को उग्र बनाने और हिंसा की रणनीति तैयार किए जाने का आरोप है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है।

जांच में यह भी सामने आया है कि आदित्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए कई संगठनों के संपर्क में आया और धीरे-धीरे आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने लगा। उसने विभिन्न प्रदर्शन स्थलों पर रिपोर्टिंग और भागीदारी भी की थी, जिससे वह श्रमिक समूहों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा था।

पुलिस और एटीएस इस बात की भी जांच कर रही हैं कि हिंसा के पीछे किसी बड़े नेटवर्क या फंडिंग का हाथ तो नहीं है। कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए अफवाह फैलाने के संकेत भी मिले हैं, जिनकी जांच जारी है। इसके अलावा विदेशी कनेक्शन के एंगल पर भी एजेंसियां काम कर रही हैं।

उग्र प्रदर्शन के बाद आरोपी नोएडा से फरार होकर चेन्नई पहुंचा और बाद में त्रिचुरापल्ली से उसे गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों का कहना है कि उससे पूछताछ के बाद पूरे मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे इस हिंसा के पीछे की पूरी साजिश का पर्दाफाश होने की संभावना है।

दिल दहला देने वाली वारदात: पिता ने जुड़वां बेटियों की हत्या की, पुलिस जांच जारी

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कानपुर के नौबस्ता थाना क्षेत्र के के-ब्लॉक किदवईनगर स्थित त्रिमूर्ति अपार्टमेंट फेज-2 में रविवार तड़के एक बेहद दर्दनाक और सनसनीखेज घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को हिला दिया। यहां एक पिता ने अपनी 11 साल की जुड़वां बेटियों की गला काटकर हत्या कर दी और उसके बाद खुद पुलिस को फोन कर वारदात की जानकारी दी।

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी पिता को हिरासत में ले लिया। पुलिस के अनुसार घटना रात करीब 2 से 2:30 बजे के बीच हुई। बच्चियों के शव उनके कमरे में बेड पर पड़े मिले, जिसके बाद पूरे अपार्टमेंट में दहशत और सदमा फैल गया।

पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी शशि रंजन मिश्रा मूल रूप से बिहार के गया का रहने वाला है और एक मेडिकल कंपनी में काम करता है। वह अपनी पत्नी, दो जुड़वां बेटियों और एक बेटे के साथ किराए के फ्लैट में रह रहा था। बच्चियां पास ही स्थित एक स्कूल में कक्षा 5 में पढ़ती थीं।

पुलिस ने घटनास्थल से एक स्टील का चापड़ बरामद किया है, जिसे वारदात में इस्तेमाल किया गया बताया जा रहा है। आरोपी ने पूछताछ में हत्या की बात स्वीकार कर ली है। फॉरेंसिक टीम को भी मौके पर बुलाकर सबूत जुटाए गए हैं और पूरे कमरे की बारीकी से जांच की जा रही है।

डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी के अनुसार, घटना के समय आरोपी पिता और बेटियां एक कमरे में सो रहे थे, जबकि पत्नी और बेटा दूसरे कमरे में थे। वारदात के बाद आरोपी ने खुद पत्नी को फोन कर सूचना दी, जिससे पूरा परिवार सदमे में आ गया।

पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की हर एंगल से जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के अनुसार पारिवारिक विवाद और मानसिक तनाव जैसी बातों की भी जांच की जा रही है। यह घटना पूरे शहर में गहरे आक्रोश और शोक का कारण बन गई है।

जनगणना ड्यूटी के चलते परिषदीय शिक्षकों के तबादले पर संकट, गर्मी की छुट्टियों में भी उम्मीद कम

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लखनऊ
प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए इस बार गर्मी की छुट्टियां राहत की बजाय निराशा लेकर आ सकती हैं। लंबे समय से प्रतीक्षित तबादला प्रक्रिया इस बार भी लटकती नजर आ रही है, जिससे शिक्षक अपने गृह जनपद या नजदीकी क्षेत्रों में स्थानांतरण की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

जानकारी के अनुसार, देश और प्रदेश में मई से घर-घर जनगणना का कार्य शुरू होने जा रहा है। इसी कारण शिक्षकों की ड्यूटी भी बड़े पैमाने पर लगाई गई है। ऐसे में विभागीय स्तर पर तबादला प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय न मिलने की आशंका जताई जा रही है।

पिछले वर्ष गर्मी की छुट्टियों में शिक्षकों के अंतर-जिला और जिला स्तरीय तबादले किए गए थे, जबकि सर्दियों में विशेष प्रक्रिया (एसआईआर) के चलते यह काम नहीं हो सका था। इसी वजह से इस बार शिक्षकों को उम्मीद थी कि गर्मी की छुट्टियों में उनका स्थानांतरण संभव हो पाएगा, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि जनगणना ड्यूटी के लिए उनकी ट्रेनिंग शुरू होने वाली है और 22 मई से 20 जून तक घर-घर सर्वे का कार्य किया जाएगा। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने मांग की है कि तबादला नीति जारी कर प्रक्रिया जनगणना से पहले पूरी की जाए, ताकि शिक्षकों को राहत मिल सके।

वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा समय में जनगणना कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए व्यापक स्तर पर तबादला प्रक्रिया करना मुश्किल दिख रहा है। हालांकि यदि बीच में कुछ समय मिलता है तो केवल सीमित स्तर पर जिले के अंदर ही तबादले संभव हो सकते हैं, वह भी उच्च स्तर की अनुमति के बाद।

इस स्थिति ने शिक्षकों के बीच असमंजस और असंतोष बढ़ा दिया है, क्योंकि वे लंबे समय से अपने परिवार के पास स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे थे। अब सबकी नजर सरकार के अगले निर्णय और समय प्रबंधन पर टिकी हुई है।

गंगा एक्सप्रेसवे: 36,000 करोड़ की लागत से मेरठ–प्रयागराज के बीच विकास की नई रफ्तार

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मेरठ
मेरठ से प्रयागराज तक बनकर तैयार हुआ बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे अब जनता के लिए जल्द ही खोल दिया जाएगा। लगभग 36,000 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह 594 किलोमीटर लंबी परियोजना उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी एक्सप्रेसवे योजनाओं में से एक मानी जा रही है, जो पश्चिमी और पूर्वी यूपी को सीधे जोड़ने का काम करेगी।

इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद मेरठ से प्रयागराज का सफर अब करीब छह घंटे में पूरा किया जा सकेगा, जो पहले कई गुना अधिक समय लेता था। तेज और सुगम यात्रा के साथ यह मार्ग व्यापार, पर्यटन और आवागमन के लिए एक गेमचेंजर साबित होने की उम्मीद है।

सरकार की ओर से इस एक्सप्रेसवे पर टोल व्यवस्था भी तय कर दी गई है। निजी कारों को एक तरफ के सफर में करीब 1515 रुपये टोल देना होगा, जबकि भारी वाहनों के लिए यह राशि 2405 रुपये से लेकर 9535 रुपये तक तय की गई है। पूरे मार्ग पर कुल 14 स्थानों पर टोल वसूली की व्यवस्था की गई है।

इस एक्सप्रेसवे की सबसे खास बात इसकी आधुनिक तकनीक है, जहां वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा। सेंसर आधारित फास्ट टोल सिस्टम के जरिए ऑटोमैटिक वसूली होगी, जिससे जाम और समय की बर्बादी काफी हद तक खत्म हो जाएगी।

सुरक्षा के लिहाज से भी सख्त नियम लागू किए गए हैं। दोपहिया वाहनों को इस एक्सप्रेसवे पर चलने की अनुमति नहीं होगी और नियम तोड़ने पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। यह व्यवस्था दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से की गई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 29 अप्रैल को हरदोई में इस एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किए जाने की संभावना है। इसके शुरू होने से 12 जिलों के 500 से अधिक गांव सीधे तौर पर जुड़ जाएंगे, जिससे रोजगार, कृषि, उद्योग और पर्यटन को नई गति मिलेगी और उत्तर प्रदेश के विकास को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

इटावा–बरेली हाईवे पर ट्रक-बस की टक्कर, बड़ा हादसा टला

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इटावा–बरेली हाईवे पर मोहम्मदाबाद क्षेत्र के गांधीनगर तकीपुर के पास उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक ट्रक ट्रैक्टर को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गया। इसी दौरान पीछे से आ रही रोडवेज बस भी ट्रक से जा भिड़ी, जिससे मौके पर कुछ देर के लिए यातायात बाधित हो गया और लोग दहशत में आ गए।

बताया गया कि यह बस शाहजहांपुर डिपो की थी, जो मथुरा से गोरी फंता की ओर जा रही थी। बस में करीब 30 से 35 यात्री सवार थे। हादसे के बावजूद राहत की बात यह रही कि किसी भी यात्री को गंभीर चोट नहीं आई, जबकि कुछ लोगों को हल्की चोटें ही लगीं।

बस चालक मिथिलेश सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि बस की गति लगभग 40 से 45 किलोमीटर प्रति घंटा थी। सामने ट्रक के अचानक अनियंत्रित होकर रुक जाने से टक्कर हो गई, जिससे बस का अगला हिस्सा ट्रक से टकरा गया और वाहन क्षतिग्रस्त हो गए।

बस परिचालक विजेंद्र सिंह ने बताया कि सभी यात्रियों को तुरंत सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। फर्रुखाबाद जाने वाले यात्रियों को दूसरी गाड़ियों से रवाना किया गया, जबकि गोरी फंता जाने वाले यात्रियों को पीछे से आ रही एक अन्य बस में बैठाकर भेजा गया, जिससे किसी को परेशानी न हो।

सूचना मिलते ही कोतवाली प्रभारी मदन मोहन चतुर्वेदी और अपराध निरीक्षक योगेंद्र सिंह सोलंकी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति को नियंत्रित कर यातायात सुचारु कराया और क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटवाकर हाईवे पर आवाजाही सामान्य कराई।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यात्रा के लिए फर्रुखाबाद से 10 श्रद्धालुओं का दल रवाना

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फर्रुखाबाद

धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी ने कलेक्ट्रेट सभागार से सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यात्रा के लिए चयनित 10 श्रद्धालुओं के दल को विधिवत मंत्रोच्चार एवं माल्यार्पण के साथ लखनऊ के लिए रवाना किया। इस दौरान पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और उल्लास से सराबोर रहा।
कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने सभी यात्रियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आस्था और राष्ट्रीय एकता का सशक्त प्रतीक है। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि वे पूरी यात्रा के दौरान अनुशासन, मर्यादा एवं एकता का परिचय देते हुए इस महत्वपूर्ण अवसर को सफल बनाएं और जनपद का नाम रोशन करें।
जिलाधिकारी ने यह भी बताया कि लखनऊ में प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री द्वारा विभिन्न जनपदों से आए श्रद्धालुओं को एकत्रित कर विशेष ट्रेन के माध्यम से सोमनाथ मंदिर के लिए रवाना किया जाएगा। यह यात्रा प्रदेश सरकार की एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहल है, जिसका उद्देश्य प्रदेशवासियों को देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों से जोड़ना और भारतीय संस्कृति के प्रति जागरूकता को बढ़ावा देना है।
जनपद फर्रुखाबाद से इस यात्रा में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं में त्रिलोकी नाथ वर्मा, चेतन भारती, शांति, सुरेंद्र कुमार पांडेय, राकेश कुमार सारस्वत, यतीन्द्र प्रकाश दुबे, निहारिका पटेल, अजय पाल, राकेश एवं अंकुर कुमार कश्यप शामिल हैं। सभी यात्रियों में यात्रा को लेकर विशेष उत्साह देखा गया और उन्होंने इस अवसर के लिए प्रदेश सरकार एवं जिला प्रशासन का आभार व्यक्त किया।
यात्रा दल के सफल संचालन हेतु सोनाली सिंह को नोडल अधिकारी नामित किया गया है, जो संपूर्ण यात्रा के दौरान समन्वय एवं व्यवस्थाओं की निगरानी करेंगी।
इस अवसर पर जिला विकास अधिकारी, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे। सभी ने यात्रियों को शुभकामनाएं देते हुए उनकी यात्रा के सफल, सुरक्षित एवं मंगलमय होने की कामना की।