नोएडा
औद्योगिक क्षेत्रों में 13 अप्रैल को हुए श्रमिक प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ के मामले में पुलिस और एसटीएफ को बड़ी सफलता मिली है। इस मामले के कथित मास्टरमाइंड 28 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य आनंद उर्फ रस्टी को तमिलनाडु से गिरफ्तार किया गया है, जिससे पूरे प्रकरण में नए खुलासों की उम्मीद बढ़ गई है।
आरोपी आदित्य आनंद मूल रूप से बिहार के हाजीपुर का रहने वाला है और उसने एनआईटी जमशेदपुर से बीटेक की पढ़ाई की थी। कैंपस प्लेसमेंट के जरिए उसे नोएडा की एक एमएनसी में नौकरी मिली थी, जिसके बाद वह बाद में गुरुग्राम और फिर नोएडा में रह रहा था। जांच में पता चला है कि वह लंबे समय से श्रमिक संगठनों और आंदोलनों से जुड़ा हुआ था।
पुलिस के अनुसार, 30 मार्च से 1 अप्रैल के बीच नोएडा स्थित उसके फ्लैट पर कई अहम बैठकें हुई थीं, जिनमें अलग-अलग मजदूर संगठनों के सदस्य शामिल हुए थे। इन्हीं बैठकों में कथित तौर पर प्रदर्शन को उग्र बनाने और हिंसा की रणनीति तैयार किए जाने का आरोप है। पुलिस इस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी हुई है।
जांच में यह भी सामने आया है कि आदित्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए कई संगठनों के संपर्क में आया और धीरे-धीरे आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाने लगा। उसने विभिन्न प्रदर्शन स्थलों पर रिपोर्टिंग और भागीदारी भी की थी, जिससे वह श्रमिक समूहों में अपनी पहचान मजबूत कर रहा था।
पुलिस और एटीएस इस बात की भी जांच कर रही हैं कि हिंसा के पीछे किसी बड़े नेटवर्क या फंडिंग का हाथ तो नहीं है। कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स के जरिए अफवाह फैलाने के संकेत भी मिले हैं, जिनकी जांच जारी है। इसके अलावा विदेशी कनेक्शन के एंगल पर भी एजेंसियां काम कर रही हैं।
उग्र प्रदर्शन के बाद आरोपी नोएडा से फरार होकर चेन्नई पहुंचा और बाद में त्रिचुरापल्ली से उसे गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों का कहना है कि उससे पूछताछ के बाद पूरे मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं, जिससे इस हिंसा के पीछे की पूरी साजिश का पर्दाफाश होने की संभावना है।


