लखनऊ
प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए इस बार गर्मी की छुट्टियां राहत की बजाय निराशा लेकर आ सकती हैं। लंबे समय से प्रतीक्षित तबादला प्रक्रिया इस बार भी लटकती नजर आ रही है, जिससे शिक्षक अपने गृह जनपद या नजदीकी क्षेत्रों में स्थानांतरण की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
जानकारी के अनुसार, देश और प्रदेश में मई से घर-घर जनगणना का कार्य शुरू होने जा रहा है। इसी कारण शिक्षकों की ड्यूटी भी बड़े पैमाने पर लगाई गई है। ऐसे में विभागीय स्तर पर तबादला प्रक्रिया पूरी करने के लिए पर्याप्त समय न मिलने की आशंका जताई जा रही है।
पिछले वर्ष गर्मी की छुट्टियों में शिक्षकों के अंतर-जिला और जिला स्तरीय तबादले किए गए थे, जबकि सर्दियों में विशेष प्रक्रिया (एसआईआर) के चलते यह काम नहीं हो सका था। इसी वजह से इस बार शिक्षकों को उम्मीद थी कि गर्मी की छुट्टियों में उनका स्थानांतरण संभव हो पाएगा, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि जनगणना ड्यूटी के लिए उनकी ट्रेनिंग शुरू होने वाली है और 22 मई से 20 जून तक घर-घर सर्वे का कार्य किया जाएगा। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने मांग की है कि तबादला नीति जारी कर प्रक्रिया जनगणना से पहले पूरी की जाए, ताकि शिक्षकों को राहत मिल सके।
वहीं विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा समय में जनगणना कार्य सर्वोच्च प्राथमिकता है, इसलिए व्यापक स्तर पर तबादला प्रक्रिया करना मुश्किल दिख रहा है। हालांकि यदि बीच में कुछ समय मिलता है तो केवल सीमित स्तर पर जिले के अंदर ही तबादले संभव हो सकते हैं, वह भी उच्च स्तर की अनुमति के बाद।
इस स्थिति ने शिक्षकों के बीच असमंजस और असंतोष बढ़ा दिया है, क्योंकि वे लंबे समय से अपने परिवार के पास स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे थे। अब सबकी नजर सरकार के अगले निर्णय और समय प्रबंधन पर टिकी हुई है।


