मेरठ
मेरठ से प्रयागराज तक बनकर तैयार हुआ बहुप्रतीक्षित गंगा एक्सप्रेसवे अब जनता के लिए जल्द ही खोल दिया जाएगा। लगभग 36,000 करोड़ रुपये की लागत से बनी यह 594 किलोमीटर लंबी परियोजना उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी एक्सप्रेसवे योजनाओं में से एक मानी जा रही है, जो पश्चिमी और पूर्वी यूपी को सीधे जोड़ने का काम करेगी।
इस एक्सप्रेसवे के शुरू होने के बाद मेरठ से प्रयागराज का सफर अब करीब छह घंटे में पूरा किया जा सकेगा, जो पहले कई गुना अधिक समय लेता था। तेज और सुगम यात्रा के साथ यह मार्ग व्यापार, पर्यटन और आवागमन के लिए एक गेमचेंजर साबित होने की उम्मीद है।
सरकार की ओर से इस एक्सप्रेसवे पर टोल व्यवस्था भी तय कर दी गई है। निजी कारों को एक तरफ के सफर में करीब 1515 रुपये टोल देना होगा, जबकि भारी वाहनों के लिए यह राशि 2405 रुपये से लेकर 9535 रुपये तक तय की गई है। पूरे मार्ग पर कुल 14 स्थानों पर टोल वसूली की व्यवस्था की गई है।
इस एक्सप्रेसवे की सबसे खास बात इसकी आधुनिक तकनीक है, जहां वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकना नहीं पड़ेगा। सेंसर आधारित फास्ट टोल सिस्टम के जरिए ऑटोमैटिक वसूली होगी, जिससे जाम और समय की बर्बादी काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
सुरक्षा के लिहाज से भी सख्त नियम लागू किए गए हैं। दोपहिया वाहनों को इस एक्सप्रेसवे पर चलने की अनुमति नहीं होगी और नियम तोड़ने पर जुर्माना और कानूनी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है। यह व्यवस्था दुर्घटनाओं को कम करने के उद्देश्य से की गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 29 अप्रैल को हरदोई में इस एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किए जाने की संभावना है। इसके शुरू होने से 12 जिलों के 500 से अधिक गांव सीधे तौर पर जुड़ जाएंगे, जिससे रोजगार, कृषि, उद्योग और पर्यटन को नई गति मिलेगी और उत्तर प्रदेश के विकास को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


