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Monday, July 13, 2026
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यूपी टी-20 लीग सीजन-4 का आगाज 14 अगस्त से, पहली बार लखनऊ और कानपुर में होंगे मुकाबले

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) की प्रतिष्ठित यूपी टी-20 लीग का चौथा संस्करण 14 अगस्त से 6 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इस बार पहली बार टूर्नामेंट का आयोजन दो शहरों—लखनऊ और कानपुर में होगा। कुल 24 दिनों तक चलने वाले इस टूर्नामेंट में 34 मुकाबले खेले जाएंगे, जिसमें 13 डबल हेडर और 8 सिंगल हेडर मैच शामिल होंगे।

टूर्नामेंट का पहला चरण भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी इकाना क्रिकेट स्टेडियम, लखनऊ में खेला जाएगा, जहां 22 मुकाबले आयोजित होंगे। इसके बाद प्रतियोगिता का दूसरा चरण ग्रीन पार्क स्टेडियम, कानपुर में होगा और फाइनल मुकाबला भी कानपुर में खेला जाएगा। यह निर्णय प्रदेश में क्रिकेट को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने और दोनों शहरों को मेजबानी का अवसर देने के उद्देश्य से लिया गया है।

यूपीसीए ने खिलाड़ियों के चयन के लिए 24 जुलाई को आगरा में मिनी ऑक्शन आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस ऑक्शन में 6 फ्रेंचाइजी कुल 45 खिलाड़ियों के लिए बोली लगाएंगी। इससे युवा खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने और पेशेवर क्रिकेट में पहचान बनाने का बड़ा मंच मिलेगा।

टूर्नामेंट की विजेता टीम को ₹1 करोड़ की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। लीग में एक बार फिर मेरठ मावेरिक्स, काशी रुद्रास, कानपुर सुपरस्टार्स, लखनऊ फाल्कन्स, गोरखपुर लायंस और नोएडा किंग्स के बीच रोमांचक मुकाबले देखने को मिलेंगे। पिछले तीन सत्रों में इस लीग ने कई युवा खिलाड़ियों को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।

यूपीसीए का मानना है कि दो शहरों में आयोजन से क्रिकेट प्रेमियों को अधिक अवसर मिलेंगे, दर्शकों की भागीदारी बढ़ेगी और उत्तर प्रदेश में क्रिकेट के विकास को नई गति मिलेगी। लीग को आईपीएल के बाद देश की प्रमुख राज्य स्तरीय टी-20 प्रतियोगिताओं में से एक माना जा रहा है, जहां से उभरते खिलाड़ियों को बड़े मंच तक पहुंचने का अवसर मिलता है।

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर वाहन भरेंगे रफ्तार, अधिकतम स्पीड लिमिट 120 किमी प्रति घंटा

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है। लगभग 63 किलोमीटर लंबे इस छह लेन एक्सेस कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे के शुरू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगी।
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा विकसित इस एक्सप्रेसवे पर आधुनिक यातायात प्रबंधन प्रणाली (आईटीएमएस), सीसीटीवी कैमरे, आपातकालीन सहायता व्यवस्था, एम्बुलेंस सेवा और सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा गया है। निर्धारित गति सीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिए हाई-टेक निगरानी व्यवस्था भी लागू की गई है।
एक्सप्रेसवे के संचालन के बाद लखनऊ से कानपुर तक का सफर, जो सामान्य दिनों में ट्रैफिक के कारण 2 से 3 घंटे तक लेता था, अब लगभग 35 से 45 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। इससे यात्रियों का समय बचेगा, ईंधन की खपत कम होगी और दोनों शहरों के बीच व्यापार, उद्योग तथा आवागमन को नई गति मिलेगी।
हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अधिकतम गति सीमा 120 किमी प्रति घंटा होने के बावजूद सभी वाहन चालकों को सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करना होगा। मौसम, यातायात और सड़क की परिस्थितियों के अनुसार वाहन चलाना अनिवार्य होगा। ओवरस्पीडिंग, गलत दिशा में वाहन चलाने और अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
करीब ₹4,700 करोड़ की लागत से तैयार इस एक्सप्रेसवे का लोकार्पण 13 जुलाई को किया जाएगा। इसके शुरू होने से लखनऊ, कानपुर, उन्नाव समेत आसपास के जिलों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी और प्रदेश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क को भी नई मजबूती मिलेगी।

‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ पर लखनऊ में होगा मंथन, दो दिन तक विभिन्न पक्षों से राय लेगी संसदीय समिति

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लखनऊ। देश में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ (एक राष्ट्र, एक चुनाव) की व्यवस्था लागू करने की दिशा में गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) अब उत्तर प्रदेश में व्यापक विचार-विमर्श करेगी। गोवा में दो दिवसीय परामर्श पूरा करने के बाद समिति दो दिन के दौरे पर लखनऊ पहुंचेगी, जहां राज्य सरकार, विधानसभा, राजनीतिक दलों, संवैधानिक विशेषज्ञों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों से सुझाव लिए जाएंगे।

भाजपा सांसद पी.पी. चौधरी की अध्यक्षता वाली इस संयुक्त संसदीय समिति में 39 सांसद शामिल हैं। समिति संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 तथा केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2024 की समीक्षा कर रही है। इन विधेयकों का उद्देश्य देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने की संभावनाओं, संवैधानिक प्रावधानों और आवश्यक कानूनी बदलावों का परीक्षण करना है।

लखनऊ में प्रस्तावित बैठकों के दौरान समिति उत्तर प्रदेश सरकार, विधानसभा अध्यक्ष, विभिन्न राजनीतिक दलों, विधायकों, राज्य निर्वाचन आयोग, संवैधानिक एवं विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, नागरिक संगठनों और मीडिया प्रतिनिधियों से विस्तार से चर्चा करेगी। इस दौरान एक साथ चुनाव कराने से जुड़े संवैधानिक, प्रशासनिक, वित्तीय और व्यावहारिक पहलुओं पर व्यापक मंथन होगा।

समिति यह भी समझने का प्रयास करेगी कि यदि पूरे देश में एक साथ चुनाव कराए जाते हैं तो चुनावी प्रक्रिया, प्रशासनिक व्यवस्था, सुरक्षा प्रबंधन, मतदाता सुविधा और शासन व्यवस्था पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। विभिन्न पक्षों से प्राप्त सुझावों और आपत्तियों को समिति अपनी अंतिम रिपोर्ट में शामिल करेगी, जिसे बाद में केंद्र सरकार को सौंपा जाएगा।
गौरतलब है कि ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। समर्थकों का मानना है कि इससे चुनावी खर्च कम होगा, प्रशासनिक संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और बार-बार लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता से विकास कार्य प्रभावित नहीं होंगे। वहीं, विपक्ष के कई दलों और कुछ संवैधानिक विशेषज्ञों ने इसके संघीय ढांचे, लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व और व्यावहारिक क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठाए हैं।
लखनऊ में होने वाला यह दो दिवसीय मंथन समिति की अंतिम रिपोर्ट तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

एक घर से 21 युवतियां मिलीं, नौकरी का झांसा देकर बुलाने के आरोप; पुलिस जांच में जुटी

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लखनऊ। राजधानी के गुड़ंबा थाना क्षेत्र के बसहा गांव में संदिग्ध परिस्थितियों में एक घर से 21 युवतियां मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सभी युवतियां अमित कुमार शुक्ला के घर पर मिलीं। आरोप है कि उन्हें एक एग्रीकल्चर कंपनी में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बुलाया गया था और उनसे पैसे भी लिए गए।

बताया जा रहा है कि वाराणसी में संबंधित कंपनी पर हुई कार्रवाई के बाद यह मामला सामने आया। इसके बाद गुड़ंबा पुलिस मौके पर पहुंची और सभी युवतियों से पूछताछ की।

पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में अधिकांश युवतियों ने बताया कि वे अपनी इच्छा से वहां आई थीं। हालांकि, एक युवती ने आपत्ति जताई, जिसके बाद उसे उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया। पुलिस अन्य युवतियों के बयान भी दर्ज कर रही है और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है।
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि नौकरी के नाम पर युवतियों से धनराशि वसूली गई थी या नहीं, संबंधित कंपनी की भूमिका क्या है और भर्ती प्रक्रिया वैध थी अथवा नहीं। मामले में सभी पहलुओं की जांच के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल जांच जारी है और तथ्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यदि किसी प्रकार की धोखाधड़ी, अवैध भर्ती या अन्य आपराधिक गतिविधि सामने आती है तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

स्पाइसजेट में नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी का भंडाफोड़, चार आरोपी गिरफ्तार; 200 से अधिक बेरोजगारों को बनाया शिकार

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नोएडा। थाना फेज-1 पुलिस ने स्पाइसजेट एयरलाइंस में नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगार युवाओं से ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपी फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर नौकरी का झांसा देकर अभ्यर्थियों से सिक्योरिटी मनी और अन्य शुल्क के नाम पर रकम वसूलते थे।

पुलिस के अनुसार, आरोपी खुद को प्रतिष्ठित कंपनी का प्रतिनिधि बताकर युवाओं को फर्जी जॉब ऑफर भेजते थे। इसके बाद चयन प्रक्रिया, दस्तावेज सत्यापन और सिक्योरिटी मनी के नाम पर उनसे ऑनलाइन भुगतान कराया जाता था। रकम मिलने के बाद आरोपी संपर्क तोड़ देते थे।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह 200 से अधिक बेरोजगार युवाओं को अपना शिकार बना चुका है। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 13 सिम कार्ड, 8 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप तथा बैंक पासबुक सहित अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए हैं।
पुलिस अब बरामद मोबाइल, बैंक खातों और डिजिटल उपकरणों की फोरेंसिक जांच कर रही है, ताकि ठगी के नेटवर्क, लेन-देन और अन्य संभावित पीड़ितों की जानकारी जुटाई जा सके। यह भी पता लगाया जा रहा है कि गिरोह का नेटवर्क अन्य राज्यों तक फैला हुआ था या नहीं।
फेज-1 थाना पुलिस का कहना है कि आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। साथ ही बेरोजगार युवाओं से अपील की गई है कि किसी भी कंपनी में नौकरी के नाम पर मांगी जाने वाली रकम का भुगतान करने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच अवश्य करें।

लखनऊ विश्वविद्यालय में 41वें दिन भी छात्रों का धरना जारी, फीस वृद्धि और निष्कासन के विरोध में आंदोलन तेज

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लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों का अनिश्चितकालीन धरना रविवार को 41वें दिन भी जारी रहा। छात्र फीस वृद्धि वापस लेने और निष्कासित छात्रों की बहाली की मांग को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। धरनास्थल पर छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी मांगों को जल्द पूरा करने की अपील की।

आंदोलनरत छात्रों का कहना है कि यह केवल फीस वृद्धि का मुद्दा नहीं, बल्कि शिक्षा तक समान पहुंच और छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा का संघर्ष है। उनका आरोप है कि फीस में बढ़ोतरी से आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, जबकि निष्कासित छात्रों की बहाली भी न्यायसंगत तरीके से की जानी चाहिए।

छात्रों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। प्रदर्शनकारी छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से वार्ता कर समाधान निकालने की भी मांग की।

वहीं, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से अब तक आंदोलन समाप्त कराने को लेकर कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। परिसर में स्थिति पर प्रशासन की नजर बनी हुई है और सुरक्षा व्यवस्था भी बनाए रखी गई है।
छात्र संगठनों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार सभी के लिए सुलभ होना चाहिए और विश्वविद्यालय प्रशासन को छात्रों की समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से करना चाहिए।