प्रयागराज
इलाहाबाद हाईकोर्ट में उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव समय पर कराए जाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर आज सुनवाई होगी। यह सुनवाई जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच द्वारा की जाएगी। इससे पहले इस मामले की सुनवाई 8 अप्रैल को टल चुकी थी, जिससे यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन ने कोर्ट में दलील दी है कि संविधान के अनुच्छेद 243E के अनुसार पंचायतों का कार्यकाल पांच साल से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता, इसलिए चुनाव समय पर कराना अनिवार्य है। याचिका में यह भी मांग की गई है कि चुनाव प्रक्रिया के लिए एक स्पष्ट और समयबद्ध कार्यक्रम कोर्ट के सामने रखा जाए।
इस मामले में 17 मार्च को पहली सुनवाई हुई थी, जिसमें हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से सवाल किया था कि पंचायत चुनाव तय समय सीमा के भीतर क्यों नहीं कराए जा रहे हैं। साथ ही कोर्ट ने आयोग से यह भी पूछा था कि क्या वह 2026 में प्रस्तावित पंचायत चुनाव समय पर कराने की स्थिति में है या नहीं।
राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से कहा गया है कि पंचायत चुनाव की अधिसूचना और प्रक्रिया में राज्य सरकार की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। वहीं आयोग ने यह भी बताया कि चुनाव की तैयारियों में मतदाता सूची पुनरीक्षण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का समय लगता है, जिससे समयसीमा प्रभावित हो सकती है।
इधर, चुनाव की तैयारियों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। आरक्षण निर्धारण, मतदाता सूची और प्रशासनिक अमले की व्यस्तता जैसी कई वजहों से चुनाव प्रक्रिया में देरी की संभावना जताई जा रही है। पंचायतों का मौजूदा कार्यकाल 2 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, ऐसे में समय पर चुनाव कराना एक बड़ा प्रशासनिक और कानूनी मुद्दा बन गया है।
फिलहाल सभी की नजरें हाईकोर्ट की आज होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जिसमें यह तय हो सकता है कि पंचायत चुनाव समय पर होंगे या फिर कार्यक्रम में कोई बदलाव किया जाएगा।








