यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। जिले में लंबे समय बाद एक सशक्त प्रशासनिक अधिकारी की आवश्यकता पूरी होती दिख रही है। वर्तमान डीएम डॉ. वी. के. सिंह ने अपनी कार्यशैली और सख्त अनुशासन से जिले की प्रशासनिक व्यवस्था में नए जीवन का संचार किया है। उनकी नीतियों और सुधार कार्यों के चलते जिले में सुशासन का माहौल बना है।
डॉ. सिंह के कार्यकाल में सबसे बड़ा परिवर्तन यह हुआ कि युटूबर फ्रॉड मीडिया और चुटभाइयों की दुकानों पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। इन अनियमित और अव्यवस्थित मीडिया चैनलों के बंद होने से जिले के प्रमुख स्तंभों की गरिमा में वृद्धि हुई है। इससे न केवल सच्ची और निष्पक्ष पत्रकारिता को बढ़ावा मिला है, बल्कि समाज के अन्य महत्वपूर्ण स्तंभों को भी सम्मान और सुरक्षा का अहसास हुआ है।
अब जब कोई व्यक्ति कलेक्ट्रेट पहुंचता है, तो उसे वास्तव में सुशासन का अनुभव होता है। प्रत्येक सरकारी कर्मचारी और अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों को गंभीरता से निभाने लगा है। महत्वपूर्ण जनों को उनकी असली कीमत और सम्मान मिलने लगा है।
डॉ. वी. के. सिंह की शानदार कार्यशैली का मुख्य कारण उनका सख्त अनुशासन, पारदर्शिता और निष्पक्षता है। उन्होंने न केवल प्रशासनिक सुधार किए हैं, बल्कि जनसेवाओं को भी सुचारू और प्रभावी बनाया है। उनका मानना है कि सुशासन तभी संभव है जब सभी लोग अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाएं।
उनकी कार्यशैली में जनसुनवाई को विशेष महत्व दिया गया है। आम नागरिकों की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान के लिए डॉ. सिंह ने कई प्रभावी कदम उठाए हैं। इसके अलावा, उन्होंने भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर सख्त कार्रवाई की है, जिससे प्रशासन में सुधार हुआ है।
डॉ. वी. के. सिंह के नेतृत्व में फर्रुखाबाद जिला एक नई दिशा में बढ़ रहा है। उनकी सशक्त और प्रभावी कार्यशैली ने जिले में सुशासन की स्थापना की है। उनकी यह पहल न केवल जिले के लिए बल्कि अन्य जिलों के लिए भी एक प्रेरणा है।
जिले में लंबे समय बाद डीएम ने कुर्सी के महत्व को किया जीवंत
पुलिस अधीक्षक आलोक प्रियदर्शी ने किया पुलिस लाइन का निरीक्षण कर, स्मार्ट तकनीकि पर दिया जोर
यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। पुलिस अधीक्षक आलोक प्रियदर्शी ने पुलिस लाइन का औचक निरीक्षण कर वहां की व्यवस्था का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान, उन्होंने संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए और पुलिस को स्मार्ट और तकनीकी में दक्ष बनाने के लिए व्यापक योजना तैयार की।
निरीक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक ने पुलिस लाइन के विभिन्न सेक्शनों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से बातचीत करते हुए उनकी समस्याओं को सुना और उन्हें शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने पुलिस कर्मियों को निर्देशित किया कि वे अपने कार्यों में अनुशासन और तत्परता बनाए रखें।
पुलिस अधीक्षक आलोक प्रियदर्शी ने पुलिस कर्मियों को तकनीकी ज्ञान और कौशल में सुधार लाने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में पुलिस को स्मार्ट और तकनीकी रूप से दक्ष होना अति आवश्यक है। इसके लिए, उन्होंने एक विस्तृत योजना तैयार की जिसमें आधुनिक उपकरणों और तकनीकों का उपयोग कर पुलिस बल को सशक्त बनाने पर जोर दिया गया है।
1. *स्मार्ट पुलिसिंग: पुलिस कर्मियों को स्मार्ट और तकनीकी रूप से दक्ष बनाने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम।
2. *आधुनिक उपकरणों का उपयोग: पुलिस लाइन में आधुनिक उपकरणों और तकनीकों का उपयोग कर कार्यकुशलता में वृद्धि।
3. *समस्याओं का समाधान: पुलिस कर्मियों की समस्याओं को प्राथमिकता देकर शीघ्र समाधान।
पुलिस अधीक्षक के इस निरीक्षण से पुलिस कर्मियों में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार हुआ है। उनके दिशा-निर्देशों और योजनाओं से पुलिस बल को स्मार्ट और तकनीकी रूप से दक्ष बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु से 15 सेमी ऊपर, चित्रकूट डिप पर बाढ़ का पानी
यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ते हुए चेतावनी बिंदु से 15 सेमी ऊपर पहुँच गया है, जिससे गंगापार क्षेत्र के दर्जनों गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। सोमवार को नरौरा बांध से गंगा में 128716 क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, जिससे गंगा का जलस्तर 136.75 मीटर तक पहुंच गया है। बाढ़ के कारण आम जनजीवन प्रभावित हुआ है और कई गांवों में पानी घुस चुका है।
बदायूं स्टेट हाईवे पर चित्रकूट डिप में भी बाढ़ का पानी आ गया है, जिससे आवागमन प्रभावित होने की संभावना बढ़ गई है। अपर जिला अधिकारी (एडीएम) सुभाष चंद्र प्रजापति ने राजेपुर ब्लॉक के कंचनपुर, सबलपुर, रामपुर जोगराजपुर, उदयपुर की मड़ैया गांवों का निरीक्षण किया। जोगराजपुर गांव में बाढ़ का पानी घुसने से जोगेंद्र पुत्र झब्बू की झोपड़ी गिर गई, जिसके बाद एडीएम ने तत्काल राहत सामग्री और देवी आपदा का लाभ देने के लिए तहसीलदार को निर्देश दिए।
एडीएम ने बाढ़ प्रभावित गांवों में नाव की उपलब्धता सुनिश्चित करने और आवश्यकता पडऩे पर ग्रामीणों को बाढ़ शरणालयों में शिफ्ट करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान, ग्रामीणों ने बताया कि अब तक मेडिकल टीम गांव में नहीं आई है और पानी घुसा हुआ है।
निरीक्षण के दौरान ग्राम रामपुर जोगराजपुर में तैनात लेखपाल राशिद अली अनुपस्थित पाए गए, जिस पर एडीएम ने नाराजगी जताते हुए तहसील अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए।
ताजा आंकड़े,
गंगा का जलस्तर:136.75 मीटर (चेतावनी बिंदु से 15 सेमी ऊपर)
नरौरा बांध से छोड़ा गया पानी: 128716 क्यूसेक
प्रभावित गांव: कंचनपुर, सबलपुर, रामपुर जोगराजपुर, उदयपुर की मड़ैया
बाढ़ राहत सामग्री वितरण: एडीएम के निर्देश पर तेजी से जारी
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य तेजी से हो सके।
गंगा पार के बच्चों की शिक्षा पर बाढ़ का कहर, सरकारी वादे और बेबस जनता
यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रूखाबाद। हर साल की तरह इस बार भी गंगा नदी की बाढ़ ने गंगापार के नौनिहालों की शिक्षा को पूरी तरह चौपट कर दिया है। बाढ़ के चलते स्कूलों में पानी भर जाने से पढ़ाई ठप हो गई है। न केवल बच्चों की शिक्षा प्रभावित हुई है, बल्कि उनके भविष्य पर भी गहरा असर पड़ा है।
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, गंगा पार क्षेत्र में स्थित 50 से अधिक प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल बाढ़ के पानी से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। करीब 10,000 छात्र-छात्राएं पढ़ाई से वंचित हो गए हैं। शिक्षकों और स्कूल प्रशासन की तरफ से कोई भी ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है, जिससे बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है।
हर साल की तरह इस साल भी सरकार और स्थानीय नेताओं ने बाढ़ से निपटने के लिए तमाम वादे किए हैं, लेकिन स्थिति में कोई खास बदलाव नहीं आया है। क्षेत्रीय विधायक और सांसद ने बाढ़ राहत और पुनर्वास के लिए बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। बाढ़ के चलते बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं।
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोग सरकार और प्रशासन की निष्क्रियता से बेहद निराश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बाढ़ से निपटने के लिए हर साल वादे तो किए जाते हैं, लेकिन उन्हें कभी भी अमल में नहीं लाया जाता। गांव के प्रधान राम प्रसाद ने कहा, हम हर साल बाढ़ का सामना करते हैं, लेकिन अब तक कोई स्थाई समाधान नहीं मिला। हमारे बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं और हम सिर्फ बेबस होकर देखते रहते हैं।
बाढ़ के कारण बच्चों की पढ़ाई का नुकसान होना उनके भविष्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बाढ़ के कारण बच्चों की शिक्षा में आए इस व्यवधान को दूर करने के लिए सरकार को विशेष प्रयास करने की जरूरत है। इसके बिना, बच्चों का भविष्य अंधकार में डूब सकता है।
हर साल बाढ़ की विभीषिका का सामना करने वाले गंगापार के लोगों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। सरकार और नेताओं के वादे तो बहुत होते हैं, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं दिखता। इस बार भी गंगा की बाढ़ ने नौनिहालों की शिक्षा को बुरी तरह से प्रभावित किया है और सरकार के वादे मूकदर्शक जनता के सामने बेबस नजर आ रहे हैं। जनता की उम्मीदें टूट चुकी हैं, लेकिन उन्हें अब भी किसी चमत्कार का इंतजार है जो उनके बच्चों के भविष्य को बचा सके।
आलू की कीमतें चरम पर, गरीब की पहुंच से दूर हो रहा सब्जियों का राजा
यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। आलू, जिसे सब्जियों का राजा कहा जाता है, अब गरीबों की पहुंच से दूर होता जा रहा है। जिले में आलू की कीमतों में भारी उछाल देखा गया है, जिससे आम जनता की रसोई पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने की तुलना में आलू की कीमतों में लगभग 30′ की वृद्धि हुई है। जहां जून में आलू की कीमत 20 रुपये प्रति किलोग्राम थी, वहीं अब यह 26 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। इस वृद्धि का मुख्य कारण उत्पादन में कमी और भंडारण की समस्याओं को बताया जा रहा है।
आलू एक प्रमुख सब्जी है जो गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के भोजन में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। कीमतों में इस बढ़ोतरी ने उनके बजट को प्रभावित किया है।छोटे दुकानदार और ठेले वाले भी इस महंगाई से परेशान हैं, क्योंकि उन्हें भी अधिक कीमत पर आलू खरीदना पड़ रहा है, जिससे उनका मुनाफा घट गया है।वही किसानों की खुशी, दूसरी ओर, किसान इस साल खुश हैं क्योंकि उन्हें उचित मूल्य मिल पा रहा है और भंडारण की समस्या से जूझना नही पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिक और व्यापारी सरकार से उम्मीद कर रहे हैं कि वह इस समस्या का समाधान निकाले और कीमतों को स्थिर रखने के लिए उचित कदम उठाए। अधिकारियों का कहना है कि वे इस मुद्दे पर ध्यान दे रहे हैं और जल्द ही समाधान निकालने का प्रयास कर रहे हैं।
आलू की कीमतों में इस तरह की अप्रत्याशित वृद्धि ने फर्रुखाबाद के निवासियों को चिंतित कर दिया है। आने वाले दिनों में कीमतों में स्थिरता आएगी या नहीं, यह देखने वाली बात होगी।
बीएसएनएल की ध्वस्त सेवाओं पर आलाधिकारियों की चुप्पी, एक बड़ा षड्यंत्र
यूथ इंडिया संवाददाता
फर्रुखाबाद। बीएसएनएल की सेवाओं की दुर्दशा और आलाधिकारियों की चुप्पी को लेकर उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। दूरसंचार क्षेत्र में कभी प्रतिष्ठित स्थान रखने वाली बीएसएनएल की सेवाओं में गिरावट को लेकर स्थानीय लोग और व्यापारी परेशान हैं। कई क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या इतनी गंभीर है कि उपभोक्ता कॉल तक नहीं कर पा रहे हैं।
पिछले 3वर्ष में बीएसएनएल की सेवाओं में लगातार गिरावट देखी गई है। इसके बावजूद, स्थानीय और उच्च स्तर के अधिकारी इस समस्या पर कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, फर्रुखाबाद जिले में बीएसएनएल के उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 50,000 है से भी ज्यादा हैं। इनमें से करीब 60′ उपभोक्ता नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं की खराबी से परेशान हैं।
जिले के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में नेटवर्क की समस्या आम है। कई बार कॉल ड्रॉप और इंटरनेट की गति शून्य तक पहुँच जाती है।उपभोक्ताओं को कई बार महत्वपूर्ण कार्यों के दौरान इंटरनेट सेवा में बाधा का सामना करना पड़ता है, जिससे छात्रों और व्यापारियों को काफी परेशानी होती है।शिकायतों पर ध्यान न देना बड़ा कारण,बीएसएनएल कार्यालयों में उपभोक्ताओं की शिकायतों का समाधान नहीं होता है।
एक स्वतंत्र सर्वेक्षण के अनुसार, बीएसएनएल की सेवाओं से असंतुष्ट उपभोक्ताओं की संख्या बढक़र 70′ हो गई है। बीएसएनएल हेल्पलाइन पर पिछले छह महीनों में 500 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें से 80′ का समाधान अब तक नहीं हुआ है। सेवा की खराबी के कारण बीएसएनएल के राजस्व में पिछले वित्तीय वर्ष में 30′ की कमी आई है।
स्थानीय और उच्च स्तर के अधिकारियों की इस समस्या पर चुप्पी को उपभोक्ता एक बड़े षड्यंत्र के रूप में देख रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, नेटवर्क में सुधार के लिए कई योजनाएं बनाई जा रही हैं, लेकिन अब तक धरातल पर कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
1. सेवाओं में सुधार- उपभोक्ता चाहते हैं कि बीएसएनएल अपनी सेवाओं में त्वरित सुधार करे।
2. शिकायत निवारण- शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक प्रभावी तंत्र स्थापित किया जाए।
3. पारदर्शिता- बीएसएनएल अधिकारियों द्वारा उपभोक्ताओं को सेवा सुधार की प्रगति के बारे में नियमित जानकारी दी जाए।
बीएसएनएल की ध्वस्त सेवाओं और अधिकारियों की चुप्पी ने उपभोक्ताओं में असंतोष को जन्म दिया है। इस स्थिति में तुरंत सुधार न किया गया तो बीएसएनएल को भविष्य में और भी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।








