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Tuesday, July 14, 2026
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श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने CEO के पद के लिए मांगे आवेदन, आवेदकों के लिए देखें पात्र शर्तें

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अयोध्या: अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट (Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust) ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के पद पर नियुक्ति के लिए आवेदन मांगे हैं। ट्रस्ट की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार यह नियुक्ति तीन वर्ष के अनुबंध पर होगी, जिसे संतोषजनक कार्य के आधार पर आगे बढ़ाया जा सकता है। नियुक्ति का स्थान अयोध्या होगा, जबकि वेतन और अन्य सेवा लाभ आपसी सहमति से तय किए जाएंगे।

अधिसूचना के अनुसार, आवेदक किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक होना चाहिए. आयु 50 से 70 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है। साथ ही किसी बड़े सार्वजनिक संगठन, सरकारी विभाग, संस्थान या कंपनी में कम से कम 20 वर्ष का प्रबंधकीय अनुभव होना अनिवार्य है। सामान्य प्रशासन, वित्त, लेखा, मानव संसाधन, जनसंपर्क, सूचना प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और विधिक मामलों का अनुभव रखने वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता मिलेगी।

ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि मंदिर या हिंदू धार्मिक संस्थान के प्रबंधन का अनुभव रखने वाले अथवा मुख्य प्रशासनिक अधिकारी (चीफ एडमिनिस्ट्रेटिव आफिसर) के रूप में कार्य कर चुके उम्मीदवारों को वरीयता दी जाएगी। आवश्यक अनुभव रखने वाले सेवानिवृत्त अधिकारी भी आवेदन के पात्र होंगे। धार्मिक पात्रता के तहत आवेदक का सक्रिय रूप से हिंदू धर्म का पालन करने वाला होना अनिवार्य रखा गया है, साथ ही भगवान श्रीराम का भक्त होना तथा वैष्णव परंपरा से जुड़ाव वांछनीय बताया गया है। हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं का कार्यसाधक ज्ञान भी आवश्यक है।

सीईओ ट्रस्ट के महासचिव (महासचिव) को रिपोर्ट करेगा और ट्रस्ट के प्रशासन, वित्तीय प्रबंधन, सुरक्षा व्यवस्था, धार्मिक अनुष्ठानों के संचालन, श्रद्धालुओं की सुविधा, ट्रस्ट की संपत्तियों के संरक्षण तथा संस्थान के समग्र संचालन और विकास की जिम्मेदारी संभालेगा। आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 18 जुलाई 2026, शाम 4 बजे निर्धारित की गई है। इच्छुक उम्मीदवार ईमेल के माध्यम से आवेदन भेज सकते हैं।

 

सीएम योगी के नेतृत्व में चला सबसे बड़ा जल संरक्षण अभियान, देश के 27% अमृत सरोवर यूपी में

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जल संरक्षण में देश में पहला स्थान, दूसरे स्थान पर रहे मध्य प्रदेश से तीन गुना आगे उत्तर प्रदेश

अमृत सरोवर, तालाबों के पुनर्जीवन, जल संरक्षण कार्यों से कृषि, पर्यावरण, भूजल संरक्षण और ग्रामीण आजीविका पर सकारात्मक असर

रिकॉर्ड 20 हजार अमृत सरोवर और पौने दो लाख तालाबों का निर्माण व जीर्णोद्धार, 16 हजार करोड़ रुपए से बदली तस्वीर

लखनऊ, 13 जुलाई : उत्तर प्रदेश ने जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है, जिसने पूरे देश के लिए एक नया मॉडल तैयार कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर रिकॉर्ड 20 हजार अमृत सरोवर बनाए जा चुके हैं और पिछले पांच वर्षों में करीब पौने दो लाख तालाबों का निर्माण व जीर्णोद्धार किया गया है। अमृत सरोवरों के निर्माण में उत्तर प्रदेश देश में पहले स्थान पर है और पूरे देश के कुल अमृत सरोवरों में करीब 27 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले उत्तर प्रदेश की है।
पिछले पांच वित्तीय वर्षों में जल संबंधी कार्यों पर 16 हजार करोड़ रुपए से अधिक का काम किया गया, जिससे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों की तस्वीर बदल रही है। जल संरक्षण की इस व्यापक मुहिम का असर अब खेती, भूजल स्तर, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है।

जल संरक्षण बढ़ाने के लिए पहले मनरेगा के तहत कुल 266 अनुमन्य कार्यों में से 78 कार्य जल संरक्षण से संबंधित रहे। वहीं, अब वीबी-जीराम-जी के तहत कुल 318 अनुमन्य कार्य हैं, जिनमें से 107 कार्य जल सुरक्षा एवं जल संरक्षण से संबंधित हैं। इनमें चेक डैम का निर्माण, सोक पिट का निर्माण, रुफ टॉप रेन वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर, तालाब का निर्माण, जलाशयों का पुनरोद्धार, बांधों का निर्माण, मेड़बन्दी, पौधारोपण शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश ने अन्य राज्यों को काफी पीछे छोड़ा

जल संरक्षण के मामले में उत्तर प्रदेश ने अन्य राज्यों को काफी पीछे छोड़ दिया है। अमृत सरोवरों के निर्माण में दूसरे स्थान पर मध्य प्रदेश है, जिसकी तुलना में उत्तर प्रदेश लगभग तीन गुना आगे है। यह उपलब्धि केवल सरकारी निर्माण कार्य तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव-गांव में जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन को जनभागीदारी से जोड़ने का परिणाम है।

हर गांव में जल संरक्षण बना जन आंदोलन

योगी सरकार ने अमृत सरोवर योजना को केवल एक निर्माण परियोजना नहीं रहने दिया, बल्कि इसे जनभागीदारी का अभियान बनाया। गांवों में पुराने तालाबों का पुनर्जीवन, नए जलाशयों का निर्माण, वर्षा जल संचयन और जल स्रोतों के संरक्षण को व्यापक स्तर पर आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ी और जल संकट से जूझ रहे इलाकों को स्थायी समाधान मिलने लगा।

खेती, भूजल और पर्यावरण को मिल रहा बड़ा सहारा

अमृत सरोवरों और तालाबों के निर्माण का सबसे बड़ा लाभ कृषि क्षेत्र को मिला है। सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने से किसानों को राहत मिली है और भूजल स्तर में व्यापक सुधार आया है। जलाशयों के आसपास हरियाली बढ़ी है, जैव विविधता को बढ़ावा मिला है और स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती मिली है।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिला नया आधार

जल संरक्षण अभियान का सकारात्मक प्रभाव ग्रामीण आजीविका पर भी पड़ा है। अमृत सरोवरों में मत्स्य पालन, पशुपालन, सिंचाई और अन्य आजीविका गतिविधियों के नए अवसर विकसित हुए हैं। वीबी-जीराम-जी के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिला, जबकि जल उपलब्धता बढ़ने से कृषि उत्पादन और किसानों की आय में भी काफी वृद्धि हुई है।

जल संरक्षण में राष्ट्रीय मॉडल बना उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश ने जल संरक्षण को विकास, पर्यावरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़कर एक ऐसा मॉडल तैयार किया है, जिसे देश के अन्य राज्यों द्वारा भी अपनाया जा रहा है। अमृत सरोवरों, तालाबों के पुनर्जीवन और व्यापक जल संरक्षण कार्यों ने यह साबित किया है कि सुनियोजित नीति, जनभागीदारी और प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से जल संकट का स्थायी समाधान संभव है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश आज जल संरक्षण के क्षेत्र में देश के लिए एक प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभरा है।

राजेपुर पुलिस का साइबर ठगों पर बड़ा प्रहार, 24 घंटे के भीतर खुलासा; मोबाइल, सिम और ठगी की रकम के साथ आरोपी गिरफ्तार

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एसपी आरती सिंह के निर्देशन में सर्विलांस टीम और थाना प्रभारी नागेंद्र सिंह की संयुक्त कार्रवाई, साइबर अपराधियों में मचा हड़कंप

अमृतपुर फर्रुखाबाद

जनपद में साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे सघन अभियान के तहत राजेपुर थाना पुलिस और सर्विलांस टीम ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए साइबर ठगी के मामले का खुलासा कर एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी के कब्जे से साइबर ठगी में प्रयुक्त दो मोबाइल फोन, तीन सक्रिय सिम कार्ड तथा ठगी से अर्जित 3,155 रुपये की नकदी बरामद की है। पुलिस की इस कार्रवाई से साइबर अपराधियों में हड़कंप मच गया है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान थाना राजपुर क्षेत्र के
कमालुद्दीनपुर के अनुज चौहान (32 वर्ष) पुत्र यशपाल सिंह रूप में हुई है। जांच में सामने आया कि आरोपी साइबर ठगी की वारदात में प्रयुक्त मोबाइल और सिम कार्ड का इस्तेमाल कर लोगों को अपना शिकार बना रहा था। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और सर्विलांस की मदद से आरोपी तक पहुंचकर उसे गिरफ्तार कर लिया।आरोपी के विरुद्ध थाना राजेपुर में मु0अ0सं0 121/2026 के तहत धारा 318(4), 317(2) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) तथा आईटी एक्ट की धारा 66-डी में मुकदमा पंजीकृत किया गया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर यह भी पता लगा रही है कि उसके तार किसी बड़े साइबर गिरोह से जुड़े हैं या नहीं तथा उसने अन्य कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है।इस कार्रवाई का श्रेय पुलिस अधीक्षक आरती सिंह के निर्देशन में चल रहे साइबर अपराध विरोधी अभियान, थाना प्रभारी नागेंद्र सिंह के नेतृत्व और सर्विलांस टीम की सतर्कता व तकनीकी जांच को दिया जा रहा है। पुलिस टीम ने सटीक सूचना और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे मामले का पर्दाफाश किया।पुलिस अधिकारियों ने बताया कि जनपद में साइबर अपराधियों के विरुद्ध अभियान लगातार जारी रहेगा। ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, ओटीपी और बैंकिंग फ्रॉड जैसी घटनाओं में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा। आम नागरिकों से भी अपील की गई है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक खाते, ओटीपी या अन्य गोपनीय जानकारी साझा न करें।

एक्सप्रेसवे नहीं, उत्तर प्रदेश की नई आर्थिक धड़कन

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शरद कटियार

उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में जिस क्षेत्र में सबसे तेज और सबसे स्पष्ट परिवर्तन दर्ज किया है, वह है सड़क अवसंरचना। कभी गड्ढों वाली सड़कों और लंबी यात्राओं के लिए पहचाना जाने वाला प्रदेश आज देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क का केंद्र बन चुका है। लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे का लोकार्पण केवल 63 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की बदलती विकास सोच का प्रतीक है।

लखनऊ और कानपुर केवल दो शहर नहीं हैं। एक प्रदेश की प्रशासनिक राजधानी है, तो दूसरा औद्योगिक राजधानी के रूप में अपनी पहचान रखता है। इन दोनों शहरों के बीच प्रतिदिन लाखों लोग रोजगार, शिक्षा, उद्योग, चिकित्सा और व्यापार के लिए यात्रा करते हैं। वर्षों से ट्रैफिक जाम, दुर्घटनाएं और लंबा सफर इस मार्ग की सबसे बड़ी समस्या रहे हैं। अब यदि यही दूरी 35 से 45 मिनट में तय होगी, तो इसका प्रभाव केवल यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर दिखाई देगा।

आज विकास का सबसे बड़ा पैमाना केवल बड़ी इमारतें नहीं, बल्कि बेहतर कनेक्टिविटी है। जिस राज्य की सड़कें मजबूत होती हैं, वहां उद्योग तेजी से पहुंचते हैं, निवेश बढ़ता है, कृषि उत्पाद समय पर बाजार तक पहुंचते हैं और रोजगार के अवसर स्वतः पैदा होने लगते हैं। यही कारण है कि दुनिया के विकसित देशों ने सड़क और परिवहन नेटवर्क को आर्थिक विकास की रीढ़ बनाया।

उत्तर प्रदेश भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और अब लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे प्रदेश के विकास मानचित्र को बदल रहे हैं। यह नेटवर्क आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश को देश की सबसे बड़ी लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक शक्ति बनाने की क्षमता रखता है।
लेकिन विकास का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सड़क बनाना बड़ी उपलब्धि है, उसे टिकाऊ, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनाए रखना उससे भी बड़ी जिम्मेदारी है। हाल के दिनों में कुछ परियोजनाओं पर पहली बारिश के बाद कटाव और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। यह संकेत है कि केवल रिकॉर्ड समय में निर्माण ही पर्याप्त नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता, नियमित रखरखाव और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।

सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक्सप्रेसवे केवल उद्घाटन तक सीमित उपलब्धि न बनें। सड़क सुरक्षा, आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं, नियमित निरीक्षण, जल निकासी व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और सड़क किनारे औद्योगिक विकास की योजनाएं भी समान गति से आगे बढ़ें। यदि इन पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो करोड़ों रुपये की परियोजनाओं का अपेक्षित लाभ सीमित हो सकता है।

एक्सप्रेसवे का वास्तविक मूल्य तब साबित होगा जब उसके किनारे नए औद्योगिक क्लस्टर बसेंगे, किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा, युवाओं के लिए रोजगार बढ़ेगा और छोटे शहर बड़े आर्थिक केंद्रों से जुड़ेंगे। सड़कें केवल वाहनों के लिए नहीं बनतीं, वे अवसरों को गति देती हैं।

आम जनमानस मानता है कि उत्तर प्रदेश ने सड़क अवसंरचना के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है। अब अगला लक्ष्य इन परियोजनाओं को गुणवत्ता, पारदर्शिता, सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि का मॉडल बनाना होना चाहिए। यदि ऐसा हुआ तो लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे केवल दो शहरों के बीच की दूरी नहीं घटाएगा, बल्कि उत्तर प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक मजबूत आधारशिला सिद्ध होगा।

यूपी ने भरी रफ्तार की ऐतिहासिक उड़ान: 35 मिनट में लखनऊ से कानपुर 4,700 करोड़ का एक्सप्रेसवे राष्ट्र को समर्पित

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– केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने फीता खोल किया लोकार्पण

लखनऊ। उत्तर प्रदेश ने विकास की सड़क पर एक और ऐतिहासिक छलांग लगाई है। वर्षों से प्रतीक्षित 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे का सोमवार को भव्य लोकार्पण रक्षा केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच संयुक्त रूप से फीता काटकर किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक, उन्नाव के सांसद डॉ. सच्चिदानंद हरि ‘साक्षी महाराज’, कानपुर नगर के सांसद रमेश अवस्थी सहित अनेक जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

करीब ₹4,700 करोड़ की लागत से तैयार यह 6-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे (NE-6) उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स में शामिल हो गया है। एक्सप्रेसवे के शुरू होने से लखनऊ और कानपुर के बीच यात्रा, जो अब तक 2.5 से 3 घंटे में पूरी होती थी, अब महज 35 से 45 मिनट में पूरी की जा सकेगी।

लोकार्पण समारोह को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि आधुनिक सड़कें केवल दूरी कम नहीं करतीं, बल्कि राज्यों की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार देती हैं। उन्होंने कहा कि यह एक्सप्रेसवे उद्योग, व्यापार, लॉजिस्टिक्स, कृषि, निवेश और रोजगार के लिए नया विकास कॉरिडोर साबित होगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे नए भारत और नए उत्तर प्रदेश की मजबूत आधारशिला बताते हुए कहा कि बेहतर कनेक्टिविटी से विकास का लाभ गांव-गांव तक पहुंचेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज देश में एक्सप्रेसवे नेटवर्क का नेतृत्व कर रहा है। पूर्वांचल, बुंदेलखंड, गंगा और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के बाद अब लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे प्रदेश की आर्थिक ताकत को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि यह परियोजना निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगी और औद्योगिक विकास को नई दिशा देगी।

यह एक्सप्रेसवे देश के आधुनिक राजमार्गों में शामिल है। इसमें इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम , सीसीटीवी निगरानी, आपातकालीन सहायता, हाई-स्पीड सुरक्षा व्यवस्था और आधुनिक टोल तकनीक जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। इस मार्ग के चालू होने से राजधानी लखनऊ और औद्योगिक नगरी कानपुर के बीच व्यापारिक गतिविधियों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

गोल्डन हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर का शुभारंभ, जिलाध्यक्ष दिनेश कटियार ने किया उद्घाटन

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कन्नौज। जिले के पाल चौराहा स्थित गोल्डन हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर का सोमवार को विधिवत शुभारंभ किया गया। उद्घाटन समारोह में अपना दल (एस) के जिलाध्यक्ष दिनेश कटियार ने फीता काटकर अस्पताल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने अस्पताल का निरीक्षण कर उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं एवं सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया और मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में जिलाध्यक्ष दिनेश कटियार के साथ रमाशंकर राठौर (जिला उपाध्यक्ष), फहीमुद्दीन, शिव प्रकाश कटियार (जिला महासचिव), खुशनूर (जिला सचिव) तथा इमरान अली सहित पार्टी के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
अस्पताल के संचालक डॉ. रिफाकत खान एवं डॉ. हारून अली से बातचीत करते हुए दिनेश कटियार ने कहा कि चिकित्सा सेवा सबसे बड़ा मानव धर्म है। मरीजों को गुणवत्तापूर्ण, सुलभ और संवेदनशील स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रत्येक चिकित्सक की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि मरीजों को बेहतर उपचार और विश्वास मिलेगा तो वे भविष्य में भी इसी संस्थान को प्राथमिकता देंगे।
इस दौरान अस्पताल प्रबंधन ने आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं तथा अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी दी। संचालकों ने आश्वासन दिया कि अस्पताल में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा और मानवीय व्यवहार के साथ उपचार उपलब्ध कराया जाएगा।
उद्घाटन के बाद अस्पताल के संचालकों ने जिलाध्यक्ष एवं उनके साथ आए अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी अतिथियों और लोगों को मिष्ठान वितरित किया गया।