शरद कटियार
उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों में जिस क्षेत्र में सबसे तेज और सबसे स्पष्ट परिवर्तन दर्ज किया है, वह है सड़क अवसंरचना। कभी गड्ढों वाली सड़कों और लंबी यात्राओं के लिए पहचाना जाने वाला प्रदेश आज देश के सबसे बड़े एक्सप्रेसवे नेटवर्क का केंद्र बन चुका है। लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे का लोकार्पण केवल 63 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की बदलती विकास सोच का प्रतीक है।
लखनऊ और कानपुर केवल दो शहर नहीं हैं। एक प्रदेश की प्रशासनिक राजधानी है, तो दूसरा औद्योगिक राजधानी के रूप में अपनी पहचान रखता है। इन दोनों शहरों के बीच प्रतिदिन लाखों लोग रोजगार, शिक्षा, उद्योग, चिकित्सा और व्यापार के लिए यात्रा करते हैं। वर्षों से ट्रैफिक जाम, दुर्घटनाएं और लंबा सफर इस मार्ग की सबसे बड़ी समस्या रहे हैं। अब यदि यही दूरी 35 से 45 मिनट में तय होगी, तो इसका प्रभाव केवल यात्रियों की सुविधा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी अर्थव्यवस्था पर दिखाई देगा।
आज विकास का सबसे बड़ा पैमाना केवल बड़ी इमारतें नहीं, बल्कि बेहतर कनेक्टिविटी है। जिस राज्य की सड़कें मजबूत होती हैं, वहां उद्योग तेजी से पहुंचते हैं, निवेश बढ़ता है, कृषि उत्पाद समय पर बाजार तक पहुंचते हैं और रोजगार के अवसर स्वतः पैदा होने लगते हैं। यही कारण है कि दुनिया के विकसित देशों ने सड़क और परिवहन नेटवर्क को आर्थिक विकास की रीढ़ बनाया।
उत्तर प्रदेश भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और अब लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे प्रदेश के विकास मानचित्र को बदल रहे हैं। यह नेटवर्क आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश को देश की सबसे बड़ी लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक शक्ति बनाने की क्षमता रखता है।
लेकिन विकास का दूसरा पक्ष भी उतना ही महत्वपूर्ण है। सड़क बनाना बड़ी उपलब्धि है, उसे टिकाऊ, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बनाए रखना उससे भी बड़ी जिम्मेदारी है। हाल के दिनों में कुछ परियोजनाओं पर पहली बारिश के बाद कटाव और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे हैं। यह संकेत है कि केवल रिकॉर्ड समय में निर्माण ही पर्याप्त नहीं, बल्कि निर्माण की गुणवत्ता, नियमित रखरखाव और जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।
सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि एक्सप्रेसवे केवल उद्घाटन तक सीमित उपलब्धि न बनें। सड़क सुरक्षा, आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं, नियमित निरीक्षण, जल निकासी व्यवस्था, पर्यावरण संरक्षण और सड़क किनारे औद्योगिक विकास की योजनाएं भी समान गति से आगे बढ़ें। यदि इन पहलुओं पर ध्यान नहीं दिया गया तो करोड़ों रुपये की परियोजनाओं का अपेक्षित लाभ सीमित हो सकता है।
एक्सप्रेसवे का वास्तविक मूल्य तब साबित होगा जब उसके किनारे नए औद्योगिक क्लस्टर बसेंगे, किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा, युवाओं के लिए रोजगार बढ़ेगा और छोटे शहर बड़े आर्थिक केंद्रों से जुड़ेंगे। सड़कें केवल वाहनों के लिए नहीं बनतीं, वे अवसरों को गति देती हैं।
आम जनमानस मानता है कि उत्तर प्रदेश ने सड़क अवसंरचना के क्षेत्र में एक नई पहचान बनाई है। अब अगला लक्ष्य इन परियोजनाओं को गुणवत्ता, पारदर्शिता, सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि का मॉडल बनाना होना चाहिए। यदि ऐसा हुआ तो लखनऊ–कानपुर एक्सप्रेसवे केवल दो शहरों के बीच की दूरी नहीं घटाएगा, बल्कि उत्तर प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक मजबूत आधारशिला सिद्ध होगा।


