बड़े संस्थानों और औद्योगिक इकाइयों में अलग-अलग शिफ्ट व्यवस्था भी होगी लागू, ट्रैफिक और प्रदूषण कम करने पर जोर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में कर्मचारियों के लिए कार्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। श्रम विभाग की बैठक में सप्ताह में दो दिन “वर्क फ्रॉम होम” व्यवस्था लागू करने को लेकर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यह व्यवस्था विशेष रूप से बड़े संस्थानों, निजी कंपनियों और औद्योगिक इकाइयों में लागू की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य महानगरों में बढ़ते ट्रैफिक दबाव, प्रदूषण और कार्यालयों में भीड़ को कम करना बताया जा रहा है। इसके तहत संस्थानों को कर्मचारियों के लिए अलग-अलग शिफ्ट में कार्यालय संचालन की व्यवस्था अपनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि एक ही समय पर अधिक भीड़ न हो।
बैठक में पब्लिक ट्रांसपोर्ट के अधिक उपयोग को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों का मानना है कि इससे ईंधन की खपत कम होगी और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी। साथ ही कर्मचारियों को यात्रा में होने वाली परेशानियों से भी राहत मिल सकेगी।
सूत्रों के अनुसार आईटी सेक्टर, कॉरपोरेट कार्यालयों और कुछ प्रशासनिक इकाइयों में इस मॉडल को प्राथमिकता के आधार पर लागू किया जा सकता है। हालांकि आवश्यक सेवाओं और उत्पादन आधारित इकाइयों में कार्य की प्रकृति के अनुसार अलग व्यवस्था रहेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि कोविड काल के बाद “वर्क फ्रॉम होम” संस्कृति को कंपनियों और कर्मचारियों दोनों ने सकारात्मक रूप से अपनाया था। अब उत्तर प्रदेश सरकार इसे संगठित रूप में लागू कर आधुनिक कार्य संस्कृति की दिशा में कदम बढ़ा रही है।


