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Thursday, May 7, 2026

“भारत की सोच परिवारवाद खत्म हो” — प्रो. एच.एन. शर्मा

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– युवा तुर्क चंद्रशेखर के राजनीतिक सलाहकार ने खोले पुराने दौर के कई राज
– एडिटर शरद कटियार संग साक्षात्कार में खुलकर बोले

लखनऊ। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री Chandra Shekhar के करीबी सहयोगी और राजनीतिक सलाहकार रहे प्रो. एच.एन. शर्मा ने परिवारवाद की राजनीति पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि “भारत की असली सोच परिवारवाद खत्म करने की है। चंद्रशेखर जी जीवनभर वंशवादी राजनीति के खिलाफ रहे। वह कभी नहीं चाहते थे कि राजनीति परिवारों की निजी संपत्ति बन जाए।”

यूथ इंडिया के प्रधान संपादक शरद कटियार के साथ विशेष बातचीत में प्रो. शर्मा ने कहा कि चंद्रशेखर केवल नेता नहीं बल्कि वैचारिक आंदोलन थे। उनका मानना था कि राजनीति में संघर्ष, संगठन और जनता का भरोसा सबसे बड़ी ताकत होनी चाहिए, न कि पारिवारिक विरासत।

उन्होंने कहा, “चंद्रशेखर जी अक्सर कहा करते थे कि लोकतंत्र में व्यक्ति बड़ा नहीं, विचार बड़ा होना चाहिए। यदि राजनीति परिवारों के कब्जे में चली जाएगी तो कार्यकर्ता और आम जनता दोनों कमजोर हो जाएंगे।”

प्रो. शर्मा ने दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में कभी परिवार आधारित राजनीति को बढ़ावा नहीं दिया। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर का स्पष्ट नारा था — “परिवारवाद खत्म हो, लोकतंत्र मजबूत हो।” यही वजह थी कि उन्हें “युवा तुर्क” कहा जाता था, क्योंकि वे सत्ता और राजनीतिक परंपराओं को खुलकर चुनौती देने का साहस रखते थे।

बातचीत के दौरान उन्होंने वर्तमान राजनीति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज देश की अधिकांश राजनीतिक पार्टियां परिवार केंद्रित होती जा रही हैं, जिससे वैचारिक राजनीति कमजोर पड़ रही है। “जब राजनीति में परिवार सबसे ऊपर आ जाता है, तब संगठन और सिद्धांत पीछे छूट जाते हैं। लोकतंत्र की असली ताकत कार्यकर्ता और जनता होती है, न कि राजनीतिक विरासत,” उन्होंने कहा।

प्रो. शर्मा ने यह भी कहा कि आज देश के युवाओं को चंद्रशेखर की राजनीति को समझने की जरूरत है। “उन्होंने सत्ता से ज्यादा संघर्ष को महत्व दिया। पद उनके लिए लक्ष्य नहीं था। वह हमेशा कहते थे कि नेता वही है जो जनता के बीच खड़ा रहे, न कि परिवार के सहारे राजनीति करे।”

साक्षात्कार के दौरान प्रो. शर्मा कई बार भावुक भी नजर आए। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर की राजनीति त्याग, ईमानदारी और वैचारिक साहस की राजनीति थी, जिसे आज के दौर में याद किए जाने की सबसे ज्यादा जरूरत है।

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