कोलकाता
पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले के विष्णुपुर में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला आरक्षण विधेयक को लेकर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों ने संसद में महिला आरक्षण बिल को रोककर देश की महिलाओं के साथ धोखा किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि टीएमसी ने “बंगाल की बहनों को धोखा दिया” और देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का भी अपमान किया है, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में महिला सशक्तिकरण को भाजपा की पहचान बताते हुए कहा कि उनकी सरकार महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और राजनीतिक भागीदारी को बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी कहा कि विकसित भारत के निर्माण में बेटियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और राजनीति में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए महिला आरक्षण आवश्यक है। पीएम ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि संसद में जो घटनाक्रम हुआ, उसने यह साफ कर दिया कि कुछ दल महिलाओं को आगे बढ़ते नहीं देखना चाहते।
इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने राज्य में कानून-व्यवस्था के मुद्दे को उठाते हुए टीएमसी कार्यकर्ताओं पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने चेतावनी दी कि कथित “टीएमसी के गुंडे” 29 अप्रैल तक आत्मसमर्पण कर दें, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है और आगामी चुनावों को लेकर माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया है।
प्रधानमंत्री के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा झूठे आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। ममता ने दावा किया कि उनकी सरकार महिलाओं के कल्याण और सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही है और महिला आरक्षण के मुद्दे पर टीएमसी की स्थिति स्पष्ट और सकारात्मक रही है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में महिला आरक्षण का मुद्दा केंद्र में आ गया है। एक ओर भाजपा इसे महिला सशक्तिकरण का बड़ा कदम बता रही है, वहीं टीएमसी और अन्य विपक्षी दल इसे राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया मुद्दा करार दे रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर सियासी बयानबाजी और तेज होने की संभावना है, जिसका असर राज्य की राजनीति और आगामी चुनावों पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।


