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Sunday, June 7, 2026

देर रात तक विकास कार्यों की मॉनिटरिंग में डीएम डॉ. अंकुर लाठर

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– कानून व्यवस्था से लेकर गौशालाओं तक पर पैनी नजर
– विकास, सुरक्षा और गो संरक्षण बन रहा नया मॉडल
– एसपी आरती सिंह क़ानून व्यवस्था को दे रहीं नई धार

फर्रुखाबाद। जनपद में विकास कार्यों, कानून व्यवस्था और गौ संरक्षण को लेकर जिला प्रशासन युद्ध स्तर पर अलर्ट मोड में दिखाई दे रहा है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर देर रात तक विभिन्न विभागों की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा कर रही हैं, वहीं पुलिस अधीक्षक आरती सिंह भी कानून व्यवस्था को लेकर लगातार फील्ड और कंट्रोल रूम स्तर पर निगरानी बनाए हुए हैं।
दोनों अधिकारियों की सक्रिय कार्यशैली का असर प्रशासनिक तंत्र में भी दिखाई दे रहा है।

सूत्रों के अनुसार जिलाधिकारी प्रतिदिन विकास कार्यों, राजस्व मामलों, जन शिकायतों, निर्माण परियोजनाओं और गौशालाओं की स्थिति की अलग-अलग समीक्षा कर रही हैं। गौशाला प्रबंधन को लेकर उनका विशेष फोकस बना हुआ है। मुख्य विकास अधिकारी सहित खंड विकास अधिकारियों, पशुपालन विभाग और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि निराश्रित गोवंशों के चारा, पानी, चिकित्सा और आश्रय की व्यवस्था में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जनपद में संचालित गौ आश्रय स्थलों की नियमित निगरानी के लिए प्रशासन ने बहुस्तरीय व्यवस्था लागू की है। कई गौशालाओं का औचक निरीक्षण किया जा चुका है और व्यवस्थाओं को लेकर लगातार फीडबैक लिया जा रहा है। जिलाधिकारी स्वयं प्रतिदिन रिपोर्ट लेकर आवश्यक निर्देश जारी कर रही हैं। यही वजह है कि गौ संरक्षण से जुड़े मामलों में अधिकारियों की जवाबदेही पहले की अपेक्षा अधिक बढ़ी है।

वहीं पुलिस अधीक्षक आरती सिंह अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा और संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी को लेकर लगातार सक्रिय हैं। थाना स्तर पर अपराध समीक्षा, रात्रि गश्त और जनसुनवाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय के चलते कई महत्वपूर्ण मामलों के त्वरित निस्तारण की दिशा में प्रगति हुई है।

जनपद में विकास योजनाओं की बात करें तो प्रधानमंत्री आवास योजना, ग्रामीण सड़क निर्माण, अमृत सरोवर, जल संरक्षण, स्वच्छता मिशन और पंचायत स्तरीय परियोजनाओं की नियमित समीक्षा की जा रही है। अधिकारियों को लक्ष्य आधारित कार्य प्रणाली अपनाने के निर्देश दिए गए हैं, जिससे योजनाओं का लाभ समय पर पात्र लोगों तक पहुंच सके।

प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक की संयुक्त कार्यशैली से विभागीय अधिकारियों में भी जवाबदेही बढ़ी है। देर रात तक होने वाली समीक्षा बैठकों और लगातार फील्ड मॉनिटरिंग के चलते अधीनस्थ अधिकारी भी सतर्क बने हुए हैं।

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