लखनऊ में बसपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को राष्ट्रीय संयोजक पद से हटा दिया। बैठक में आकाश को बुलाया भी नहीं गया। मायावती ने कहा कि आकाश को अभी और परिपक्व होने की जरूरत है और चुनाव में कम समय बचा है, ऐसे में पार्टी की बड़ी जिम्मेदारी देना उचित नहीं होगा।
आकाश की जगह पहली बार उनके छोटे भाई ईशान आनंद बैठक में मायावती और अपने पिता आनंद कुमार के साथ पहुंचे। ईशान ने बसपा का पटका पहन रखा था। बैठक में देशभर से करीब 350 पदाधिकारी शामिल हुए और 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर मंथन हुआ।
मायावती ने साफ किया कि बसपा उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव अकेले लड़ेगी। उन्होंने पदाधिकारियों को पार्टी के निर्देशों का पूरी ईमानदारी से पालन करने और संगठन को मजबूत करने के निर्देश दिए।
आकाश से जिम्मेदारी छीने जाने का यह तीसरा बड़ा घटनाक्रम है। दिसंबर 2023 में उन्हें उत्तराधिकारी और राष्ट्रीय संयोजक बनाया गया था। मई 2024 में जिम्मेदारियां छीनकर जून में दोबारा बहाल किया गया। मार्च 2025 में उन्हें पार्टी से बाहर किया गया, फिर अप्रैल में माफी और मई में दोबारा बड़ी जिम्मेदारी दी गई। अब एक बार फिर राष्ट्रीय संयोजक पद से हटा दिया गया है।
मायावती ने कहा कि कांशीराम परिवार और रिश्तेदारों को पार्टी के काम में सहयोग की अनुमति देते थे, लेकिन चुनाव लड़ाने या सत्ता में पद देने के पक्ष में नहीं थे। उन्होंने कहा कि बसपा का लक्ष्य शोषित वर्ग को सत्ता में भागीदारी दिलाना है और पार्टी में वही आगे बढ़ेगा जो बहुजन समाज के हित में काम करेगा।
बैठक में मायावती ने कांग्रेस, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और केंद्र-राज्य सरकारों पर भी निशाना साधा। उन्होंने दलित-अंबेडकर मुद्दों, आरक्षण, महंगाई, प्राकृतिक आपदाओं और युवाओं की समस्याओं को उठाया। बसपा 2027 के लिए 30 से अधिक विधानसभा सीटों पर प्रभारी घोषित कर चुकी है, जबकि कई और नामों पर मंथन जारी है।


