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Tuesday, June 2, 2026

लखनऊ: कसमंडी किले विवाद पर सपा सांसदों का नहीं मिला समर्थन, भड़की लाखन आर्मी ने दी बड़ी चेतावनी

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लखनऊ: राजधानी लखनऊ (Lucknow) के मलिहाबाद के कसमंडी किले का विवाद (Kasmandi Fort dispute) अब तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में नया मोड़ तब आया, जब लाखन आर्मी इस मुद्दे को संसद में उठाने की मांग लेकर पासी समाज से आने वाले सांसदों के आवास पर पहुंची, लेकिन समर्थन मांगने निकली लाखन आर्मी को समाजवादी पार्टी के सांसदों की प्रतिक्रिया रास नहीं आई।

मोहनलालगंज से सपा सांसद आरके चौधरी के साथ लाखन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी की तीखी बहस हुई। वहीं, अयोध्या सांसद अवधेश पासी भी लाखन आर्मी से नहीं मिले, जबकि कौशांबी सांसद पुष्पेंद्र सरोज भी अपने आवास पर नहीं मिले। इसे लेकर लाखन आर्मी के सदस्यों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ऐसे सांसदों को दोबारा जीतने नहीं देंगे।

दरअसल, लाखन आर्मी लंबे समय से मलिहाबाद के कसमंडी विवाद को लेकर आंदोलन चला रही है। संगठन की मांग है कि इस मुद्दे को संसद में उठाया जाए और पासी समाज से आने वाले जनप्रतिनिधि खुलकर समर्थन दें। लाखन आर्मी ने दो दिन पहले ही सांसदों से मिलने की सूचना सोशल मीडिया के जरिए दी थी। संगठन के मुताबिक, प्रदेश अध्यक्ष लोकेश पासी, बाराबंकी जिला अध्यक्ष अभिषेक पासी और अन्य कार्यकर्ता उनसे मिलने पहुंचे थे, लेकिन सांसद न तो कार्यालय में मिले और न आवास पर।

इससे नाराज कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन को मौके पर ही आग के हवाले कर दिया। लाखन आर्मी के नेताओं ने आरोप लगाया कि उनके साथ “सौतेला व्यवहार” किया गया। कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसे सांसद को दोबारा संसद नहीं भेजा जाएगा। वहीं, मीडिया से बातचीत में सांसद अवधेश पासी ने कहा कि उन्हें इस मुद्दे की जानकारी ही नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा जानबूझकर इस विवाद को हवा दे रही है। अवधेश पासी ने कहा कि पासी समाज के भीतर फूट डालने की कोशिश की जा रही है और कसमंडी विवाद को राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।

सबसे ज्यादा चर्चा मोहनलालगंज सांसद आरके चौधरी से हुई मुलाकात को लेकर रही। लाखन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी अपने समर्थकों के साथ आरके चौधरी के आवास पहुंचे और कसमंडी मुद्दे पर समर्थन मांगा। उन्होंने सांसद को ज्ञापन भी सौंपा, लेकिन मुलाकात के बाद सूरज पासी खुलकर नाराज दिखे। उन्होंने आरोप लगाया कि बातचीत के दौरान आरके चौधरी ने एक बार भी महाराज कंस पासी का नाम नहीं लिया। सूरज पासी ने कहा, “अगर समाज के जनप्रतिनिधि ही हमारे मुद्दे पर साथ नहीं देंगे तो भी आंदोलन नहीं रुकेगा। समर्थन मिले या न मिले, हम झुकने वाले नहीं हैं और न रुकने वाले हैं, अपने पूर्वज महाराज कंस पासी के सम्मान के लिए लड़ाई जारी रहेगी।”

उन्होंने आरके चौधरी को घेरते हुए कहा कि अगर यह मुद्दा संसद में नहीं उठाया गया तो जनता खुद आवाज बुलंद करेगी। सूरज पासी ने पासी समाज से भी सवाल पूछा कि जिन नेताओं को समाज का मसीहा कहा जाता है, अगर वे महाराज कंस पासी का नाम तक नहीं लेते तो समाज को इस पर विचार करना चाहिए।

मुलाकात के दौरान लाखन आर्मी समर्थकों की नाराजगी खुलकर सामने आई। कुछ कार्यकर्ताओं ने कहा कि उन्होंने आरके चौधरी को सांसद बनाकर गलती की, मौके पर आरके चौधरी मुर्दाबाद के नारे भी लगे। सूरज पासी ने कहा कि यह अभियान यहीं नहीं रुकेगा। संगठन दूसरे सांसदों के आवास पर भी जाएगा और जिन नेताओं के लिए वोट मांगे गए थे, उनसे अब समाज के मुद्दों पर समर्थन मांगा जाएगा।

मुलाकात के बाद आरके चौधरी ने कहा कि उन्होंने ज्ञापन ले लिया है। उसका अध्ययन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से बातचीत की जाएगी और उसके बाद आगे की प्रतिक्रिया दी जाएगी। मलिहाबाद का कसमंडी विवाद पिछले कुछ समय से चर्चा में बना हुआ है।

विवाद एक पुराने किले को लेकर है, जिस पर पासी समाज और मुस्लिम पक्ष के अलग-अलग दावे हैं। पासी समाज का कहना है कि यह स्थल महाराज कंस पासी का ऐतिहासिक किला है। उनका आरोप है कि वहां कब्जा किया गया है, नमाज पढ़ी जा रही है और जगह को कब्रिस्तान के रूप में विकसित करने की कोशिश हो रही है। वहीं, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि उस स्थान पर लंबे समय से नमाज पढ़ी जाती रही है और उनका दावा भी पुराना है।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन पहले ही दोनों पक्षों को किले के अंदर और आसपास किसी भी तरह की धार्मिक गतिविधि करने से रोक चुका है, लेकिन अब इस विवाद में राजनीतिक प्रतिक्रिया, समर्थन जुटाने की कोशिश और जनप्रतिनिधियों पर बढ़ते दबाव ने इसे नई दिशा दे दी है।

 

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