लखनऊ: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों में उछाल के बीच भारत में भी पेट्रोल-डीजल से लेकर रसोई गैस (LPG cylinder) तक महंगी होती जा रही है। इसी बीच केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) के तहत मिलने वाले सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की वार्षिक सीमा को घटाकर बड़ा बदलाव किया है, जिस पर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है।
सरकार ने उज्ज्वला योजना के तहत सब्सिडी वाले एलपीजी सिलेंडरों की संख्या सालाना 9 से घटाकर केवल 4 कर दी है। इस फैसले को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार की आर्थिक और विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर राहुल गांधी ने लिखा कि पिछले 12 वर्षों की गरीब-विरोधी आर्थिक नीतियों और कमजोर विदेश नीति ने देश को ऐसे मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां लाखों गरीब परिवारों और महिलाओं को फिर से लकड़ी और पारंपरिक ईंधन के धुएं पर निर्भर होने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार ने पिछले तीन महीनों में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 89 रुपये की वृद्धि की और अब सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या भी कम कर दी है। उनके अनुसार, यह कदम सीधे तौर पर गरीब परिवारों के रसोई बजट पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला है।
उन्होंने कहा कि प्रवासी मजदूरों के लिए महत्वपूर्ण 5 किलो वाले गैस सिलेंडर की कीमत में भी 323 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि बढ़ती महंगाई के बीच मजदूर और निम्न आय वर्ग आखिर अपनी रोजमर्रा की जरूरतें कैसे पूरी करेंगे।
कांग्रेस नेता ने सरकार पर उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने और आम जनता पर आर्थिक दबाव बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जहां बड़े कॉरपोरेट समूहों को भारी राहत दी जा रही है, वहीं मजदूर, किसान, महिलाएं और मध्यम वर्ग सरकार की नीतियों की कीमत चुका रहे हैं।
उधर, केंद्र सरकार का कहना है कि सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या में कटौती औसत घरेलू खपत के आधार पर की गई है। सरकार के मुताबिक अधिकांश उज्ज्वला लाभार्थियों की वार्षिक गैस खपत को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया गया है।


