फर्रुखाबाद। शहर के प्रमुख सरकारी अस्पताल डॉ राम मनोहर लोहिया चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में वर्षों पहले स्थापित की गई टेलीफोन व्यवस्था अब पूरी तरह ठप पड़ चुकी है, जिससे डॉक्टरों और चिकित्सा कर्मियों के बीच आपसी संवाद बाधित हो रहा है।
वर्षों पहले शुरू हुई थी सुविधा
अस्पताल प्रशासन ने आपातकालीन सेवाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से टेलीफोन सिस्टम स्थापित कराया था। इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि आपातकालीन कक्ष में मौजूद डॉक्टर, नर्स और अन्य स्टाफ आपस में तुरंत संपर्क कर सकें और मरीजों को त्वरित उपचार मिल सके।
लेकिन समय के साथ यह व्यवस्था रखरखाव के अभाव में धीरे-धीरे खराब होती चली गई और अब स्थिति यह है कि आपातकालीन कक्ष में लगे टेलीफोन केवल शोपीस बनकर रह गए हैं।
आपातकालीन सेवाओं पर पड़ रहा असर
टेलीफोन व्यवस्था के ठप होने से डॉक्टरों को आपसी समन्वय में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गंभीर मरीजों के इलाज के दौरान कई बार तुरंत निर्णय और संपर्क की आवश्यकता होती है, लेकिन संचार साधनों की कमी के कारण इलाज में देरी हो सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आपातकालीन सेवाओं में हर सेकंड कीमती होता है और इस तरह की लापरवाही मरीजों के लिए घातक साबित हो सकती है।
जिम्मेदार कौन?
अस्पताल प्रशासन की ओर से इस समस्या पर अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सवाल यह उठता है कि जब इस व्यवस्था को शुरू किया गया था, तो उसके रखरखाव और नियमित जांच की जिम्मेदारी किसकी थी।
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में अक्सर सुविधाएं शुरू तो कर दी जाती हैं, लेकिन समय के साथ उनकी देखरेख नहीं की जाती, जिससे करोड़ों रुपये की लागत बेकार चली जाती है।
सुधार की मांग तेज
अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके परिजनों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द टेलीफोन व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए। इसके साथ ही नियमित निरीक्षण और मेंटेनेंस की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न उत्पन्न हो।
अव्यवस्था की भेंट चढ़ी संचार व्यवस्था — आपातकालीन कक्ष के टेलीफोन बने ‘सफेद हाथी’


