– नामांकन बढ़ाने के भी निर्देश
लखनऊ। प्रदेश में बेसिक शिक्षा व्यवस्था को लेकर हाल ही में हुई विभागीय समीक्षा बैठक में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। समीक्षा के दौरान पाया गया कि 25 जिलों में छात्रों को पाठ्यपुस्तकों का वितरण अपेक्षित गति से नहीं हो पा रहा है, जिससे नई शैक्षणिक सत्र की शुरुआत में ही पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
सबसे गंभीर स्थिति बहराइच में देखने को मिली, जहां 2834 विद्यालयों में से 2002 स्कूलों में अब तक किताबें नहीं पहुंच सकी हैं। गौरतलब है कि इसी जिले में फरवरी के शुरुआती दिनों में किताबों को कबाड़ में बेचने का मामला भी सामने आया था, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अन्य जिलों की स्थिति भी चिंताजनक है। आजमगढ़ के 2955 में से 1921 विद्यालयों, संभल के 1289 में से 803 विद्यालयों, बांदा के 1797 में से 630 विद्यालयों और चित्रकूट के 1262 में से 377 विद्यालयों में अभी तक किताबें नहीं पहुंच पाई हैं। यह स्थिति शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करती है।
इसके अलावा अयोध्या, गोरखपुर, सीतापुर, अमेठी और लखनऊ जैसे जिलों में भी दर्जनों विद्यालयों तक सभी विषयों की किताबें नहीं पहुंची हैं। वहीं, इटावा और हाथरस ने तो अब तक वितरण की कोई रिपोर्ट ही प्रस्तुत नहीं की है, जिससे प्रशासनिक लापरवाही साफ नजर आती है।
किताबों की कमी का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है, खासकर ग्रामीण और सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। समय पर किताबें न मिलने से सत्र की शुरुआत कमजोर हो रही है और शिक्षण कार्य बाधित हो रहा है।
वहीं दूसरी ओर, “स्कूल चलो अभियान” के तहत नामांकन बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। कक्षा एक में पिछले वर्ष की तुलना में दो लाख से अधिक नए नामांकन हुए हैं। कक्षा पांच से छह में 6.66 लाख और आठ से नौ में 18,912 छात्रों का नामांकन दर्ज किया गया है। इस श्रेणी में अलीगढ़ 41.77 फीसदी के साथ शीर्ष पर है, जबकि श्रावस्ती सबसे पीछे बना हुआ है।
इसी तरह कक्षा पांच से छह में कौशांबी 47.74 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर है, जबकि हरदोई सबसे पीछे है। कक्षा आठ से नौ में अमेठी बेहतर प्रदर्शन कर रहा है, जबकि औरैया और कानपुर नगर की स्थिति कमजोर बनी हुई है। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को वितरण व्यवस्था सुधारने और नामांकन में तेजी लाने के सख्त निर्देश दिए हैं।


