फर्रुखाबाद।आसमान में मंगलवार की शाम मोहर्रम का चांद दिखाई दिया।काजी सैयद मुताहिर अली, मौलाना सैयद फरहत अली जैदी और मौलाना सैयद सदाकत हुसैन सैंथली ने चांद की तस्दीक की, जिसके साथ ही मोहर्रम की पहली तारीख का ऐलान कर दिया गया।
जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना मुफ्ती भोआज्जम अली ने भी इसकी पुष्टि की। इसके साथ ही शहर के इमामबाड़ों और अजाखानों में फर्श-ए-अजा बिछने लगी है ताजिए और अलम सजा दिए गए, और मजलिसों व मातम का दौर शुरू हो गया।
मोहर्रम का चांद मंगलवार को नजर आने के साथ ही शहर में जहां इमामबाड़ों में शबीह-ए-अलम, ताबूत और ताजिए सजेने लग है ।वहीं घरों महिलाओं ने दो माह आठ दिन के लिए श्रृंगार त्याग कर गम का लिबास ओढ़ लिया और मजलिसों का आयोजन शुरू हो गया । पुरुषों ने इमामबाडों में पहुंच कर मातम किया और इमाम हुसैन की शहादत को याद किया। पहली मोहर्रम की तारीख के साथ ही दस दिनों का
अस्ताना-ए-वारिस पाक पर ताजिए के साथ मातमी सिलसिला शुरू हो गया। शहर के गढ़ी अब्दुल मजीद खां, बीबीगंज, अस्ताना-ए-वारिस पाक और दरगाह हजरत अब्बास में मजलिसों की तैयारियां पहले से ही तेज थीं। अनीसा बेगम वारसी द्वारा बनवाया जा रहा पुश्तैनी ताजिया एक बार फिर श्रद्धा का केंद्र बनेगा। यह ताजिया कर्बला नहीं जाता, बड़ी संख्या में लोग इसे देखने आते हैं। दो मुहर्रम को शाम छह बजे पहला मातमी जुलूस लाल सराय की मस्जिद से निकलेगा, जो नेहरू रोड, किराना बाजार, टाउन हाल होते हुए दरगाह हजरत अब्बास पर संपन्न होगा। तीन मुहर्रम को हाजी साधना किन्नर की सरपरस्ती में चांदी का ताजिया जुलूस निकलेगा, जो चीनी ग्रान इमामबाड़ा से शुरू होकर वापसी में वहीं पहुंचेगा।
मोहर्रम के चांद के साथ इमामबाड़ों में बिछने लगी फर्श-ए-अजा, मातम का दौर शुरू


