– डीएम के आदेश पर खुली जांच, राइफल लाइसेंस पर घिरे भाजपा नेता प्रदीप उर्फ शंकर सिंह
फर्रुखाबाद। अपराधी के इतिहास छुपा कर सत्ता की हनक में शस्त्र लाइसेंस जारी कराने का मामला जिलाधिकारी नें गंभीरता से संज्ञान लिया है । जिलाधिकारी कार्यालय से एडीएम और आयुध प्राधिकारी अरुण सिंह नें जाँच के लिए पत्र जारी कर प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। मोहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के ग्राम अरसानी निवासी भाजपा नेता प्रदीप सिंह उर्फ शंकर ने अपना आपराधिक इतिहास और मूल निवास संबंधी तथ्य छिपाकर वर्ष 2021 में राइफल का शस्त्र लाइसेंस हासिल कर लिया था ।
मामला तब तूल पकड़ गया जब फतेहगढ़ निवासी एक महिला ने जिलाधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कर आरोप लगाया कि संबंधित लाइसेंस धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेजों और भ्रामक तथ्यों के आधार पर प्राप्त किया गया। शिकायत में यह भी मांग की गई है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर लाइसेंस निरस्त करने के साथ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया जाए।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी कार्यालय ने शिकायत को अपर पुलिस अधीक्षक फतेहगढ़ के पास जांच के लिए भेज दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की बिंदुवार जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही हैं तो आखिर शस्त्र लाइसेंस जारी होने से पहले पुलिस सत्यापन और प्रशासनिक जांच की प्रक्रिया में यह तथ्य सामने क्यों नहीं आए? क्या जांच एजेंसियों को गुमराह किया गया या फिर सत्यापन प्रक्रिया में कहीं बड़ी चूक हुई?
शस्त्र लाइसेंस कोई सामान्य दस्तावेज नहीं बल्कि सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ा संवेदनशील विषय है। ऐसे में यदि किसी व्यक्ति ने गलत जानकारी देकर लाइसेंस प्राप्त किया है तो यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वाला मामला बन सकता है।
अब निगाहें पुलिस जांच पर टिकी हैं। यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो न केवल लाइसेंस निरस्त हो सकता है, बल्कि धोखाधड़ी और कूटरचना जैसी गंभीर धाराओं में कार्रवाई का रास्ता भी खुल सकता है।


