– प्रशासन से लगाई न्याय की गुहार
फर्रुखाबाद। शहर के आईटीआई चौराहा स्थित पुराने भूमि विवाद ने फिर तूल पकड़ लिया है। पीड़ित साध परिवार का आरोप है कि परिवार के कई सदस्य वर्षों पहले शहर से बाहर चले गए थे, जिसका फायदा उठाकर शीतग्रह स्वामी उमेश अग्रवाल, विनय चावला और उनके कथित गैंग नें उनकी खरीदी हुईं जमीन पर एक भाई कर हिस्सा लिखा के कागजी गोलमाल कर पूरी चार बीघा कब्जा कर लिया। अब मामला परिवार के भीतर विवाद पैदा कर प्रशासनिक और कानूनी लड़ाई का रूप ले चुका है।
परिवार की ओर से प्रस्तुत दस्तावेजों में वर्ष 1995 के एक दीवानी वाद का भी उल्लेख है , जिसमें साध परिवार के कई सदस्य पक्षकार बताए गए हैं। परिवार का कहना है कि जमीन के स्वामित्व और कब्जे से जुड़े पुराने अभिलेख उनके दावे को मजबूत करते हैं, लेकिन इसके बावजूद उनकी संपत्ति पर अवैध कब्जा कर लिया गया।न्यायालय से भी उन्हें आदेश मिल चुका इसके बाद भी दवंगई कर विवाद डाले हैँ
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि लक्ष्मी शीतालय मलिक उमेश अग्रवाल विनय चावला सहित उनके कथित सहयोगियों ने जमीन पर कब्जा जमाने के लिए परिस्थितियों का लाभ उठाया। परिवार का कहना है कि जब वे बाहर थे, तब विवादित भूमि पर कब्जे की कार्रवाई को अंजाम दिया गया और अब परिवार के सदस्यों के बीच ही विवाद खड़ा कर दिया गया है।जबकि उक्त ज़मीन 1987 से आज तक बैंक में भी बंधक है।
मामले को लेकर परिवार ने जिला प्रशासन, राजस्व विभाग और पुलिस अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराकर वास्तविक स्वामित्व की स्थिति स्पष्ट करने तथा कब्जा हटवाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो उनकी पुश्तैनी संपत्ति पूरी तरह हाथ से निकल सकती है।
उधर, स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि भूमि विवादों को लेकर उमेश अग्रवाल का नाम पहले भी विवादों में सामने आता रहा है। शहर की ठंडी सड़क क्षेत्र में कथित रूप से अवैध तरीके से विकसित किए गए विला प्रोजेक्ट और भूमि संबंधी विवादों को लेकर भी उनका नाम चर्चाओं में रहा है।
अब निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। यदि अभिलेखों, न्यायालयी दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की गहन जांच होती है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवादित भूमि का वास्तविक स्वामी कौन है और कब्जे के आरोपों में कितनी सच्चाई है। पीड़ित परिवार नें डीएम दरवार में न्याय की उम्मीद लगाई है।


