नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक ने वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की लगातार बढ़ती कीमतों के बीच अपने स्वर्ण भंडार में लगातार वृद्धि की है। केंद्रीय बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत के पास अब 880.5 टन सरकारी स्वर्ण भंडार है, जिसकी अनुमानित बाजार कीमत 115.8 अरब अमेरिकी डॉलर, यानी करीब 9.6 लाख करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। पिछले दो वर्षों में सोने की कीमतों में आई तेज बढ़ोतरी के कारण इस भंडार का मूल्य लगभग दोगुना हो गया है।
रिजर्व बैंक पिछले कई वर्षों से विदेशी मुद्रा भंडार को अधिक सुरक्षित और संतुलित बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसी नीति के तहत अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने और सुरक्षित निवेश को बढ़ावा देने के लिए सोने की खरीद लगातार बढ़ाई जा रही है। वर्ष 2015 में भारत के पास 557.8 टन स्वर्ण भंडार था, जो बढ़कर अब 880.5 टन हो गया है। इस दौरान स्वर्ण भंडार में लगभग 58 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, वैश्विक आर्थिक अस्थिरता और विभिन्न देशों पर लगाए जा रहे वित्तीय प्रतिबंधों के कारण दुनिया के कई केंद्रीय बैंक सोने को सबसे सुरक्षित संपत्ति मानते हुए उसका भंडार बढ़ा रहे हैं। सोना मुद्रा विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव और आर्थिक संकट के समय सुरक्षा कवच का काम करता है।
रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार पिछले छह महीनों में भारत के कुल विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी लगभग 12 प्रतिशत से बढ़कर 17 प्रतिशत हो गई है। इससे स्पष्ट है कि भारत अपनी विदेशी मुद्रा संपत्तियों को अधिक मजबूत, सुरक्षित और विविधतापूर्ण बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में भी वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए रिजर्व बैंक स्वर्ण भंडार बढ़ाने की नीति जारी रख सकता है।


