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Tuesday, July 7, 2026

भारत-इंडोनेशिया के बीच 14 अहम समझौते, रक्षा और सामरिक साझेदारी को मिली नई मजबूती

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ब्रह्मोस मिसाइल, साबांग बंदरगाह, समुद्री सुरक्षा, दुर्लभ खनिज और प्रौद्योगिकी सहयोग पर बनी सहमति; हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ेगा रणनीतिक संतुलन

जकार्ता। नरेंद्र मोदी और प्रबोवो सुबियांतो के बीच मंगलवार को हुई शिखर वार्ता में भारत और इंडोनेशिया ने रक्षा, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, कृषि, स्वास्थ्य और महत्वपूर्ण खनिजों सहित विभिन्न क्षेत्रों में 14 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाई देने तथा क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक साझेदारी को मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया।

वार्ता के दौरान रक्षा क्षेत्र को दोनों देशों के सहयोग का प्रमुख आधार बनाया गया। इसके तहत इंडोनेशिया ने भारत से ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल और अस्त्र हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली हासिल करने पर सहमति जताई। दोनों देशों ने रक्षा उत्पादन, संयुक्त अनुसंधान, तकनीकी विकास और सैन्य प्रौद्योगिकी के आदान-प्रदान को भी बढ़ावा देने का निर्णय लिया। इससे भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।

दोनों देशों ने सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण साबांग बंदरगाह के संयुक्त विकास पर भी सहमति बनाई। यह बंदरगाह मलक्का जलडमरूमध्य के निकट स्थित है, जहां से दुनिया के बड़े समुद्री व्यापार का संचालन होता है। इस परियोजना के माध्यम से समुद्री सुरक्षा, नौवहन सहयोग और आपदा प्रबंधन को भी नई मजबूती मिलेगी। इसके साथ ही अंडमान-निकोबार क्षेत्र और इंडोनेशिया के आचेह क्षेत्र के बीच समुद्री संपर्क बढ़ाने पर भी सहमति बनी।

बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने, इस्पात, निकल तथा दुर्लभ खनिजों के प्रसंस्करण में निवेश बढ़ाने, कृषि, स्वास्थ्य, डिजिटल भुगतान प्रणाली और चुनाव प्रबंधन में सहयोग बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया। भारत की चुनावी तकनीक और डिजिटल भुगतान प्रणाली के अनुभव को इंडोनेशिया के साथ साझा करने पर भी सहमति बनी।

संयुक्त बयान में दोनों देशों ने आतंकवाद के सभी स्वरूपों की कड़ी निंदा करते हुए इसके विरुद्ध वैश्विक स्तर पर समन्वित और निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और इंडोनेशिया की साझेदारी केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक शांति, स्थिरता तथा विकास पर भी पड़ेगा।

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