– आंकड़े दे रहे बड़ी चेतावनी
नई दिल्ली। देश इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है और हालात अब खतरनाक स्तर पर पहुंच चुके हैं। कई राज्यों में तापमान 44°C से 47°C के बीच दर्ज किया जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार मई-जून में यह और बढ़ सकता है, क्योंकि इस बार ‘एल नीनो’ प्रभाव सक्रिय है।
आंकड़ों के मुताबिक, भारत में सामान्य से 1.5°C से 2°C अधिक तापमान रिकॉर्ड किया जा रहा है। बुंदेलखंड, राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के कई जिलों में लगातार 5–10 दिन तक हीटवेव की स्थिति बनी हुई है। कुछ इलाकों में रात का तापमान भी 30°C से ऊपर रह रहा है, जिससे राहत नहीं मिल रही।
विशेषज्ञों के अनुसार ‘एल नीनो’ के कारण इस साल मानसून प्रभावित हो सकता है। सामान्य स्थिति में जून से सितंबर के बीच भारत में करीब 87% वार्षिक वर्षा होती है, लेकिन एल नीनो वर्षों में यह 10–20% तक कम हो जाती है। इसका मतलब है कि जहां बारिश से राहत मिलनी चाहिए, वहां भी गर्मी का असर बना रहेगा।
स्वास्थ्य विभाग के अनुमान बताते हैं कि हीटवेव के दौरान डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक के मामलों में 25–30% तक बढ़ोतरी होती है। पिछले वर्षों में हीटवेव के कारण देशभर में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। सबसे ज्यादा खतरा बच्चों, बुजुर्गों और बाहर काम करने वाले लोगों को होता है।
सबसे खतरनाक समय सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक माना जा रहा है, जब सूरज की किरणें सीधे शरीर पर असर डालती हैं। विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि इस समय घर से बाहर निकलने से बचें और हर घंटे पानी पीते रहें।
हीट स्ट्रोक के लक्षणों में तेज सिरदर्द, चक्कर, उल्टी, बेहोशी और पसीना बंद होना शामिल है। ऐसे मामलों में तुरंत ठंडक देकर अस्पताल ले जाना जरूरी है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति केवल मौसम की नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन का संकेत है। लगातार बढ़ती गर्मी, घटती बारिश और बदलते मौसम पैटर्न आने वाले वर्षों में और बड़ी चुनौती बन सकते हैं।


