– राज्य सरकार से मांगी कार्रवाई रिपोर्ट
लखनऊ। चीनी मांझे से हो रही मौतों और लगातार बढ़ते हादसों पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार को चीनी मांझे की बिक्री पर प्रभावी रोक सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार से अब तक की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि प्रतिबंध के बावजूद बाजार में चीनी मांझे की उपलब्धता गंभीर चिंता का विषय है। न्यायालय ने इस पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब इस पर रोक है तो इसकी बिक्री अब भी कैसे हो रही है।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिए कि चीनी मांझे के निर्माण, भंडारण और बिक्री के खिलाफ चलाए गए अभियानों, दर्ज मुकदमों और की गई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा अगली सुनवाई में प्रस्तुत किया जाए।
अदालत ने यह भी कहा कि चीनी मांझे के कारण हर वर्ष लोगों की जान जाती है और बड़ी संख्या में राहगीर, बाइक सवार, बच्चे तथा पक्षी हादसों का शिकार होते हैं। ऐसे में इस समस्या को हल्के में नहीं लिया जा सकता और प्रभावी कार्रवाई आवश्यक है।
मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को निर्धारित की गई है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि यदि प्रतिबंध के बावजूद चीनी मांझे की बिक्री जारी रही तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जा सकती है।
गौरतलब है कि चीनी मांझा नायलॉन और धातुयुक्त पदार्थों से तैयार किया जाता है, जिससे बिजली के तारों, पक्षियों और राहगीरों के लिए गंभीर खतरा पैदा होता है। इसी वजह से इसके निर्माण और बिक्री पर पहले से प्रतिबंध लागू है, लेकिन इसके बावजूद कई क्षेत्रों में इसकी अवैध बिक्री की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं।


