नई दिल्ली। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर अपनी मजबूती साबित की है। केंद्र सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष में देश की वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 7.7 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह आंकड़ा फरवरी में जारी किए गए 7.6 प्रतिशत के अनुमान से भी बेहतर रहा है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि दर दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले भारत की स्थिति को और मजबूत करती है। ऐसे समय में जब कई विकसित और विकासशील देश धीमी आर्थिक वृद्धि की चुनौती से जूझ रहे हैं, भारत लगातार तेज विकास दर बनाए रखने में सफल रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार बढ़ते पूंजी निवेश, बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं, मजबूत घरेलू मांग, डिजिटल अर्थव्यवस्था का विस्तार और सरकार की आर्थिक नीतियां इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। सड़क, रेलवे, रक्षा, विनिर्माण और सेवा क्षेत्रों में तेजी से हुए विस्तार ने भी आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी है।
सरकार का दावा है कि आर्थिक सुधारों, निवेश को प्रोत्साहन और कारोबार सुगमता बढ़ाने के प्रयासों का सकारात्मक असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। वहीं उद्योग जगत ने भी GDP के ताजा आंकड़ों का स्वागत करते हुए इसे निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत बताया है।
हालांकि अर्थशास्त्रियों का कहना है कि तेज आर्थिक वृद्धि के साथ रोजगार सृजन, ग्रामीण आय में वृद्धि और महंगाई नियंत्रण जैसे मुद्दों पर भी लगातार ध्यान देना होगा ताकि विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच सके।
भारत की 7.7 प्रतिशत GDP वृद्धि दर यह संकेत देती है कि देश वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में एक मजबूत और तेजी से उभरती हुई आर्थिक शक्ति के रूप में अपनी पहचान और मजबूत कर रहा है।


