कन्नौज। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद और अपने बेबाक बयानों के लिए चर्चित रहने वाले नेता सुब्रत पाठक एक बार फिर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। सोशल मीडिया पर साझा की गई एक पोस्ट को लेकर पार्टी के अंदर और बाहर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है। पोस्ट में भाजपा के कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के वरिष्ठ नेता और क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल के नाम का उल्लेख करते हुए पीडीए की ऐसी व्याख्या प्रस्तुत की गई है, जिसे कई लोग राजनीतिक मर्यादा के विपरीत और अपमानजनक मान रहे हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही पोस्ट में लिखा गया है कि “पीडीए का अर्थ पक्के दलाल अराजक” तथा इसके साथ क्षेत्रीय अध्यक्ष प्रकाश पाल का नाम भी जोड़ा गया है। पोस्ट सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी के संदर्भ में इस प्रकार की टिप्पणी क्यों और किस उद्देश्य से की गई।
कन्नौज की राजनीति में सुब्रत पाठक को मुखर और आक्रामक नेता माना जाता है। वे अक्सर विपक्ष पर तीखे हमले करते रहे हैं, लेकिन इस बार निशाने पर अपनी ही पार्टी का एक वरिष्ठ चेहरा दिखाई देने से मामला अलग रंग लेता नजर आ रहा है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि यह पोस्ट सीधे तौर पर क्षेत्रीय अध्यक्ष के संदर्भ में की गई है तो यह संगठनात्मक अनुशासन और राजनीतिक शिष्टाचार पर भी प्रश्न खड़े करती है।
भाजपा संगठन हमेशा सार्वजनिक मंचों पर अनुशासन और संगठन सर्वोपरि होने की बात करता रहा है। ऐसे में पार्टी के भीतर से ही सामने आई इस तरह की पोस्ट को लेकर कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चा तेज है। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत नाराजगी का परिणाम बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे क्षेत्रीय राजनीति के बदलते समीकरणों से जोड़कर देख रहे हैं।
दिलचस्प बात यह है कि पोस्ट वायरल होने के बाद भी अब तक किसी आधिकारिक स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है। न तो सुब्रत पाठक की ओर से कोई सार्वजनिक सफाई सामने आई है और न ही भाजपा संगठन ने इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है।


