एसडीएम पर रिश्वतखोरी और कोतवाल पर दबाव में मुकदमा लिखने का आरोप
फर्रुखाबाद
जिले की कायमगंज तहसील में न्यायिक व्यवस्था को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है, जहां फर्जी मुकदमा दर्ज किए जाने से आक्रोशित अधिवक्ताओं ने कामकाज ठप कर हड़ताल शुरू कर दी। अधिवक्ताओं ने उपजिलाधिकारी पर रिश्वत लेने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं कायमगंज कोतवाली प्रभारी विनोद कुमार शुक्ला पर बिना जांच के मुकदमा दर्ज करने का आरोप लगाकर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
मामले की जड़ में उपजिलाधिकारी न्यायालय में तैनात अहलमद फौजदारी अनुज कुमार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत है, जिसमें आरोप लगाया गया कि 20 अप्रैल 2026 की शाम करीब 4:45 बजे न्यायालय में राजकीय कार्य के दौरान लगभग 10 अधिवक्ताओं ने पहुंचकर हंगामा किया। शिकायत के अनुसार अधिवक्ताओं सरनेश यादव, इंद्रेश गंगवार, अवनीश गंगवार उर्फ लालू सहित अन्य ने न्यायालय परिसर में मौजूद कर्मचारियों के साथ अभद्रता की, पत्रावलियों को अस्त व्यस्त कर दिया और मुख्य द्वार को लात मारकर उसकी कुंडी तोड़ दी। इस आधार पर संबंधित अधिवक्ताओं के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
हालांकि अधिवक्ताओं ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे साजिश करार दिया है। अधिवक्ता इंद्रेश गंगवार का कहना है कि घटना के समय वह जिले में मौजूद ही नहीं थे और उनकी लोकेशन की पुष्टि के लिए मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) और सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जा सकती है। उनका आरोप है कि प्रशासनिक अधिकारियों ने दबाव में आकर झूठा मुकदमा दर्ज कराया है, ताकि वकीलों की आवाज को दबाया जा सके।
वकीलों ने आरोप लगाया कि उपजिलाधिकारी स्तर पर भ्रष्टाचार चरम पर है और बिना लेन-देन के कोई कार्य नहीं हो रहा। वहीं पुलिस पर भी पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाते हुए कहा गया कि बिना किसी निष्पक्ष जांच के सीधे मुकदमा दर्ज कर दिया गया, जो न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद तहसील परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि जब तक मुकदमा वापस नहीं लिया जाता और निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। वहीं प्रशासन की ओर से अभी तक आरोपों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं आया है, जिससे विवाद और गहराता जा रहा है।


