वॉशिंगटन। डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने शेयर ट्रेडिंग को लेकर विवादों में घिर गए हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स और सरकारी दस्तावेजों के अनुसार ट्रंप ने फरवरी 2026 में माइक्रोसॉफ्ट और अमेज़न के 50 लाख डॉलर से लेकर 2.5 करोड़ डॉलर तक के शेयर बेचे थे। इसके बाद मार्च में उन्होंने इन्हीं कंपनियों के करोड़ों डॉलर मूल्य के शेयर दोबारा खरीद लिए।
रिपोर्ट्स के मुताबिक इन लेनदेन की जानकारी निर्धारित समयसीमा के भीतर सार्वजनिक नहीं की गई, जिसके चलते ट्रंप पर जुर्माना लगाया गया है। अमेरिकी ऑफिस ऑफ गवर्नमेंट एथिक्स के नियमों के अनुसार राष्ट्रपति को 1,000 डॉलर से अधिक की किसी भी शेयर ट्रेडिंग की जानकारी 45 दिनों के भीतर सार्वजनिक करनी होती है। लेकिन ट्रंप द्वारा समयसीमा का पालन नहीं किए जाने पर उन पर 200 डॉलर का जुर्माना लगाया गया।
बताया जा रहा है कि इससे पहले भी मार्च और पिछले वर्ष अगस्त में इसी प्रकार जानकारी देने में देरी के चलते ट्रंप पर जुर्माना लगाया जा चुका है। इस मामले के सामने आने के बाद अमेरिकी राजनीति और कारोबारी जगत में चर्चा तेज हो गई है।
रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप ने 10 फरवरी को Nvidia के शेयर भी खरीदे थे। इसके कुछ ही दिनों बाद एनवीडिया ने Meta Platforms के साथ डेटा सेंटर प्रोजेक्ट को लेकर साझेदारी की घोषणा की, जिसके बाद कंपनी के शेयरों में करीब 2.5 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई।
हालांकि अब तक ट्रंप की ओर से इन आरोपों और शेयर ट्रेडिंग विवाद पर कोई विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। विपक्षी नेताओं और कुछ विश्लेषकों ने मामले में पारदर्शिता और हितों के टकराव को लेकर सवाल उठाए हैं, जबकि ट्रंप समर्थकों का कहना है कि यह केवल तकनीकी प्रक्रिया से जुड़ा मामला है।


