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Wednesday, May 27, 2026

सार्थक-पीडीएस’ योजना को मिली कैबिनेट की मंजूरी

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*₹25,530 करोड़ की सार्थक-पीडीएस योजना को मंजूरी।
*राज्यों को खाद्यान्न परिवहन में मिलेगी आर्थिक सहायता।
*पीडीएस का आधुनिकीकरण, कालाबाजारी रोकने पर जोर।

 

नई दिल्ली
देश के 81 करोड़ से अधिक गरीबों तक राशन व्यवस्था को पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने बुधवार को नई ‘सार्थक-पीडीएस’ योजना को मंजूरी दे दी। इस महत्वाकांक्षी योजना पर अगले पांच वर्षों में 25,530 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का दावा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद फर्जी राशन कार्ड, कालाबाजारी और अनाज चोरी पर बड़ी रोक लगेगी, जबकि लाभार्थियों को समय पर पूरा राशन मिल सकेगा।

नई योजना के तहत अब राशन वितरण प्रणाली को पूरी तरह डिजिटल और एकीकृत बनाया जाएगा। भारतीय खाद्य निगम के गोदाम से लेकर अंतिम राशन दुकान तक हर गतिविधि की रियल टाइम निगरानी होगी। सरकार पहली बार पीडीएस व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग और ब्लॉकचेन जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल करने जा रही है। इससे सिस्टम खुद यह पहचान सकेगा कि कहां वितरण में गड़बड़ी हो रही है, कहां अनाज की चोरी हो रही है या कहां फर्जीवाड़े की आशंका है।

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अभी राशन व्यवस्था दो अलग-अलग योजनाओं के जरिए संचालित हो रही थी, जिससे राज्यों के बीच समन्वय और निगरानी में दिक्कत आती थी। अब दोनों व्यवस्थाओं को मिलाकर ‘सार्थक-पीडीएस’ नाम से एक नई एकीकृत प्रणाली तैयार की गई है, जो 31 मार्च 2031 तक लागू रहेगी।

सरकार राज्यों में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर भी स्थापित करेगी, जहां पूरे राशन नेटवर्क की निगरानी होगी। शिकायत निवारण के लिए एआई आधारित सिस्टम विकसित किया जाएगा। साथ ही राशन दुकानदारों को राहत देते हुए उनका कमीशन बढ़ाने का भी निर्णय लिया गया है। कई राज्यों को एफसीआई गोदामों से राशन दुकानों तक अनाज पहुंचाने में आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था, जिसे देखते हुए केंद्र सरकार अब अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी देगी।

सरकार का मानना है कि नई तकनीक आधारित व्यवस्था से गरीबों को उनका पूरा अधिकार मिलेगा और सार्वजनिक वितरण प्रणाली पहले से अधिक भरोसेमंद बनेगी। वहीं विपक्ष और कई सामाजिक संगठनों की नजर अब इस बात पर है कि राज्यों में इस योजना को कितनी प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।

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