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Wednesday, July 15, 2026

राम मंदिर चढ़ावा घोटाला: एसआईटी रिपोर्ट में प्रबंधन पर गंभीर सवाल

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क्या बड़े चेहरों पर कार्रवाई से बच रही जांच

अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के मामले में एसआईटी (विशेष जांच दल) की रिपोर्ट लगभग तैयार हो गई है। रिपोर्ट जल्द ही शासन को सौंपी जाएगी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, जांच में मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। हालांकि रिपोर्ट में पूर्व महासचिव चंपत राय के खिलाफ आपराधिक साजिश का स्पष्ट निष्कर्ष सामने नहीं आया है और न ही उन्हें औपचारिक रूप से क्लीन चिट दिए जाने की पुष्टि हुई है। ऐसे में यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या जांच बड़े जिम्मेदार लोगों तक पहुंचेगी या केवल प्रशासनिक कमियों तक सीमित रह जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में चढ़ावे की सुरक्षा और प्रबंधन व्यवस्था में गंभीर खामियों का उल्लेख किया है। जांच में यह तथ्य सामने आया कि टिन्नू यादव नामक व्यक्ति, जो ट्रस्ट के अधिकृत रिकॉर्ड में शामिल नहीं था, उसे मंदिर की संवेदनशील व्यवस्थाओं और चढ़ावे की हुंडियों की चाबियों तक पहुंच प्राप्त थी। रिपोर्ट में इसे सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी चूक माना गया है और निगरानी तंत्र पर सवाल उठाए गए हैं।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि बैंकिंग प्रक्रिया, मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के पालन और नियुक्तियों में कथित लापरवाही के लिए तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच की गई है। कुछ प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल उठाए गए हैं, जबकि आपराधिक साजिश के पहलू की जांच पुलिस विवेचना के स्तर पर जारी बताई गई है।

एसआईटी ने भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें भी की हैं। इनमें ट्रस्ट का नियमित और थर्ड-पार्टी ऑडिट, चढ़ावे की गिनती और जमा करने की पारदर्शी व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी को मजबूत करना, कंट्रोल रूम की 24 घंटे सक्रिय मॉनिटरिंग और नियुक्तियों में निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना शामिल है।

राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे की कथित चोरी और गबन के आरोपों ने मंदिर प्रबंधन की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। अब सबकी निगाहें शासन और जांच एजेंसियों पर हैं कि एसआईटी रिपोर्ट के आधार पर जवाबदेही तय होगी या मामला केवल प्रशासनिक सुधारों तक सीमित रह जाएगा। यदि जांच में किसी भी स्तर पर आपराधिक जिम्मेदारी सामने आती है, तो उसके अनुसार आगे की कानूनी कार्रवाई पुलिस विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया के तहत की जाएगी।

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