रातोंरात हुआ ध्वस्तीकरण, लगाए गए पौधे
इटावा। इटावा के बीहड़ क्षेत्र में स्थित और स्थानीय लोगों के बीच “बीहड़ वाले सैयद बाबा” के नाम से प्रसिद्ध मजार को वन विभाग ने बुधवार देर रात बुलडोजर चलाकर ध्वस्त कर दिया। गुरुवार सुबह जब श्रद्धालु और ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो वहां मजार का नामोनिशान तक नहीं बचा था। पूरी जमीन समतल कर दी गई थी और वहां पौधे लगा दिए गए थे। अचानक हुए इस घटनाक्रम को देखकर लोग हैरान रह गए।
जानकारी के अनुसार बुधवार शाम करीब छह बजे वन विभाग की टीम तीन बुलडोजरों और भारी पुलिस बल के साथ फिशर वन क्षेत्र पहुंची। मजार तक जाने वाले सभी रास्तों पर पुलिस तैनात कर दिए जाने के बाद किसी को भी मौके पर जाने की अनुमति नहीं दी गई। देर रात तक चली कार्रवाई में लगभग 3000 वर्गफीट क्षेत्र में फैले पूरे ढांचे को ध्वस्त कर दिया गया।
वन विभाग का कहना है कि मजार संरक्षित वन भूमि पर अवैध रूप से निर्मित थी। विभागीय अभिलेखों, पुराने राजपत्रों तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर यह भूमि वन विभाग के स्वामित्व वाली पाई गई। विभाग के अनुसार वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत केंद्र सरकार की अनुमति के बिना इस भूमि पर किसी भी प्रकार का गैर-वन निर्माण नहीं किया जा सकता।
मामले की शुरुआत इसी वर्ष जनवरी में हुई, जब मुख्यमंत्री पोर्टल पर मजार को लेकर शिकायत दर्ज कराई गई। शिकायत के बाद वन विभाग ने जांच शुरू की। जांच में पाया गया कि मजार फिशर वन क्षेत्र के कंपार्टमेंट नंबर-3 में स्थित है। इसके बाद वन विभाग ने धार्मिक गतिविधियों पर रोक लगाते हुए जिला वन अधिकारी की अदालत में वाद दायर किया।
सुनवाई के दौरान मजार पक्ष को कई अवसर दिए गए, लेकिन निर्माण से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके बाद अदालत ने भूमि पर किसी भी प्रकार का वैधानिक अधिकार न होने की बात कहते हुए मजार हटाने का आदेश पारित कर दिया। मजार के केयरटेकर फजले इलाही ने इस आदेश के खिलाफ अपील भी की, लेकिन वन संरक्षक स्तर पर उनकी अपील भी खारिज हो गई।
मजार की देखरेख करने वाले पक्ष का दावा है कि यह दरगाह करीब 800 वर्ष पुरानी थी और क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं धार्मिक पहचान का हिस्सा रही है। हालांकि इसके निर्माण, स्थापना और स्वामित्व से संबंधित कोई आधिकारिक अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। हर वर्ष फरवरी माह में यहां उर्स का आयोजन होता था, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते थे। इस वर्ष प्रशासनिक कार्रवाई के चलते उर्स का आयोजन नहीं हो सका।
ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह न्यायिक आदेश और वन भूमि संरक्षण कानूनों के तहत की गई है, जबकि मजार से जुड़े लोगों का कहना है कि इससे क्षेत्र की एक ऐतिहासिक धार्मिक धरोहर समाप्त हो गई है। फिलहाल पूरे इलाके में पुलिस और प्रशासन की निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।


