वडोदरा: गुजरात के वडोदरा में बीजेपी नेता (BJP leader) से उनके बेटे को निजी मेडिकल कॉलेज (Private medical college) में मैनेजमेंट कोटा से MBBS सीट दिलाने के नाम पर 55 लाख रुपये की कथित ठगी का मामला सामने आया है। आरोप है कि पांच लोगों ने 2019 में मेडिकल कॉलेज में दाखिला कराने का भरोसा देकर रकम ली, लेकिन न सीट दिलाई और न ही पैसे वापस किए। रकम लौटाने के लिए दिए गए चेक भी कथित तौर पर बाउंस हो गए।
पुलिस ने 1 सितंबर को बीजेपी नेता और वडोदरा नगर निगम के पूर्व पार्षद मुकेश दीक्षित की शिकायत पर पांच लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया। आरोपी वडोदरा निवासी अजितेशकुमार सारंगी, उनकी पत्नी तेजल, चंद्रेश याग्निक और दिल्ली निवासी रंजीत मुखिया व संजीव झा बताए गए हैं।
शिकायत के मुताबिक, दीक्षित का बेटा शिवांग 12वीं में साइंस स्ट्रीम से पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर बनना चाहता था। NEET में अपेक्षाकृत कम रैंक आने के कारण उसे मेरिट के आधार पर मेडिकल कॉलेज में दाखिला नहीं मिल सका। इसके बाद परिवार ने निजी मेडिकल कॉलेजों में मैनेजमेंट कोटा की सीट तलाशनी शुरू की।
अप्रैल 2019 में एक एजेंसी के संपर्क में आने के बाद दीक्षित ने मुख्य आरोपी अजितेशकुमार सारंगी से बात की। आरोप है कि सारंगी ने कर्नाटक, महाराष्ट्र या राजस्थान के निजी मेडिकल कॉलेज में सीट दिलाने का भरोसा दिया और करीब 60 लाख रुपये खर्च होने की बात कही। FIR के अनुसार, शुरुआत में तीन चेक के जरिए करीब 60 लाख रुपये लेने की बात हुई। इनमें से 15 लाख रुपये ‘ऑर्बिटल करियर’ नामक संस्था के खाते में जमा किए गए। बाद में चेक से भुगतान में दिक्कत का हवाला देकर 40 लाख रुपये नकद मांगे गए, जो दीक्षित ने कथित तौर पर दे दिए।
मई-जून 2019 में आरोपियों ने सीट उपलब्ध नहीं होने की बात कही और अगले साल दाखिले का भरोसा दिया। अगले साल भी दाखिला नहीं हुआ। दीक्षित के मुताबिक, रकम वापस मांगने पर आरोपियों ने कुछ चेक दिए, लेकिन वे भी बाउंस हो गए। बाद में आरोपियों ने वडोदरा स्थित अपना कार्यालय बंद कर दिया।दीक्षित ने 2022 में भी पुलिस से संपर्क किया था। अब दर्ज FIR के बाद गोरवा पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस पैसों के लेन-देन, दाखिले के कथित वादे और आरोपियों की भूमिका की जांच करेगी। मेडिकल में दाखिला न मिलने के बाद शिवांग ने बाद में फिजियोथेरेपी की पढ़ाई की।


