41 C
Lucknow
Monday, May 25, 2026

पश्चिम बंगाल में बीजेपी की जीत का ‘यूपी मॉडल’,सुनील बंसल की रणनीति ने बदली सियासी बिसात

Must read

– मंत्री जे पी एस राठौर, सांसद रमेश अवस्थी, महेश शर्मा की टीम बनी नए चेहरे
लखनऊ/कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति में बीजेपी की अप्रत्याशित मजबूती के पीछे उत्तर प्रदेश में आजमाया गया ‘माइक्रो मैनेजमेंट मॉडल’ निर्णायक साबित हुआ। इस पूरे ऑपरेशन की कमान संभालने वाले सुनील बंसल ने एक बार फिर अपने रणनीतिक कौशल से पार्टी को नई जमीन पर खड़ा कर दिया। यूपी में लगातार चार चुनाव जिताने का अनुभव बंगाल में सीधे तौर पर लागू किया गया और नतीजा टीएमसी के मजबूत गढ़ों में भी बीजेपी की पैठ।
सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी ने बंगाल चुनाव को ‘युद्ध स्तर’ पर लेते हुए अक्टूबर से ही यूपी की भरोसेमंद टीम को मैदान में उतार दिया था। इस टीम ने केवल प्रचार नहीं किया, बल्कि बूथ स्तर तक राजनीतिक समीकरणों को समझकर जमीन पर काम किया। पार्टी ने पूरे पश्चिम बंगाल को पांच रणनीतिक क्षेत्रों में बांटा, जहां यूपी और उत्तराखंड के वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई।
इनमें सहकारिता मंत्री जेपीएस राठौर, पूर्व कैबिनेट मंत्री सुरेश राणा, उत्तराखंड के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत, सांसद रमेश अवस्थी और सांसद महेश शर्मा शामिल रहे।
सबसे अहम भूमिका जेपीएस राठौर को सौंपी गई, जिन्हें 35 विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी गई थी। इनमें पूर्वी और पश्चिमी मेदिनीपुर जैसे इलाके शामिल थे, जिन्हें टीएमसी का अभेद किला माना जाता रहा है। लेकिन बीजेपी ने यहां बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की नई टीम खड़ी कर दी।
जांच में सामने आया है कि इस चुनाव में बीजेपी ने तीन स्तरों पर काम किया पहला, माइक्रो बूथ मैनेजमेंट, जहां हर बूथ पर 15-20 कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी तय की गई।
दूसरा, डेटा आधारित रणनीति, जिसमें मतदाताओं की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रोफाइलिंग की गई।
तीसरा, स्थानीय विवाद समाधान, जहां कार्यकर्ताओं को निर्देश था कि छोटे-छोटे विवादों को मौके पर सुलझाकर जनता का भरोसा जीता जाए।
बीजेपी सूत्रों का दावा है कि करीब 60% बूथों पर पार्टी ने पहली बार ‘पूर्ण संरचना’ खड़ी की, जबकि 2019 के लोकसभा चुनाव में यह आंकड़ा 30-35% के बीच था। यही कारण रहा कि जिन क्षेत्रों में बीजेपी पहले तीसरे-चौथे स्थान पर रहती थी, वहां सीधे मुकाबले में आ गई।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में बीजेपी की इस बढ़त ने साफ कर दिया है कि यूपी मॉडल अब पार्टी का राष्ट्रीय चुनावी फॉर्मूला बन चुका है। हालांकि, विपक्ष इसे ‘बाहरी हस्तक्षेप’ और ‘प्रबंधन आधारित राजनीति’ बताकर सवाल उठा रहा है।
लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि सुनील बंसल की टीम ने बंगाल की राजनीति में संगठनात्मक ढांचे को इस तरह स्थापित किया, जिसने चुनावी समीकरण ही बदल दिए। अब सवाल यह है कि क्या यही मॉडल आने वाले अन्य राज्यों में भी बीजेपी की जीत का रास्ता तैयार करेगा या फिर स्थानीय राजनीति इसका जवाब देगी।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article