— डॉ. हीरा लाल
जीवन में कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं जो हमारे वर्षों पुराने विश्वासों को चुनौती दे देती हैं। हम चाहे जितना तर्क, विज्ञान और कर्म पर भरोसा करें, कभी-कभी कुछ अनुभव हमें यह सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि शायद इस संसार में बहुत कुछ ऐसा भी है, जिसे हम अभी पूरी तरह समझ नहीं पाए हैं।
लगभग छह महीने पहले नोएडा प्रवास के दौरान मेरी मुलाकात देश के प्रतिष्ठित हस्तरेखा विशेषज्ञ एवं पामवेद के संस्थापक डॉ. लक्ष्मीकान्त त्रिपाठी से हुई। सामान्य बातचीत के दौरान उन्होंने मेरी हथेली देखी और बिना किसी पूर्व जानकारी के मेरे व्यक्तित्व के बारे में कई बातें कहीं।
उन्होंने कहा कि मैं एक अत्यंत संवेदनशील व्यक्ति हूँ, जिसे धन से अधिक प्रेम, अपनापन और मानवीय रिश्तों का महत्व समझ में आता है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रकृति, पर्यावरण और जीव-जंतुओं के प्रति मेरा विशेष लगाव रहेगा और मैं ऐसे कार्यों में रुचि लूँगा, जिनमें सामान्यतः लोग आगे नहीं आते। उन्होंने आगे कहा कि इन प्रयासों के कारण मुझे समाज में विशेष पहचान मिलेगी और अगले छह महीने के भीतर कोई बड़ा सम्मान प्राप्त होगा।
उस समय मैंने उनकी बात को सम्मानपूर्वक सुना, लेकिन अपने स्वभाव के अनुसार इसे अपने कर्मों से जोड़कर ही देखा। मेरा हमेशा से मानना रहा है कि व्यक्ति का भविष्य उसके कर्म तय करते हैं। मैंने कभी किसी पुरस्कार या सम्मान की इच्छा से काम नहीं किया। समाज, पर्यावरण और जनहित के लिए जो भी किया, उसे अपना दायित्व समझकर किया।
लेकिन समय बीता और ठीक छह महीने के भीतर मुझे पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए एक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ। उस क्षण अनायास ही डॉ. लक्ष्मीकान्त त्रिपाठी की कही हुई बातें स्मरण हो आईं। उनकी भविष्यवाणी का इस प्रकार सत्य सिद्ध होना मेरे लिए केवल संयोग नहीं, बल्कि एक ऐसा अनुभव था जिसने सोचने का नया दृष्टिकोण दिया।
यह अनुभव मुझे अंधविश्वास की ओर नहीं ले जाता, बल्कि यह स्वीकार करने की प्रेरणा देता है कि भारतीय ज्ञान परंपरा में कुछ ऐसे आयाम भी हैं, जिनका वैज्ञानिक अध्ययन और गंभीरता से मूल्यांकन किया जाना चाहिए। संभव है कि हस्तरेखा विज्ञान में भी कुछ ऐसे संकेत छिपे हों, जिन्हें अनुभवी व्यक्ति पढ़ सकता है।
फिर भी मेरा विश्वास आज भी यही है कि भाग्य अवसर दे सकता है, लेकिन सफलता तक पहुँचाने का कार्य केवल कर्म करते हैं। यदि हमारी हथेली में कुछ लिखा भी है, तो उसे सार्थक बनाने की जिम्मेदारी हमारे प्रयासों, हमारी निष्ठा और हमारे चरित्र की होती है।
मैं डॉ. लक्ष्मीकान्त त्रिपाठी को उनकी सटीक भविष्यवाणी के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ देता हूँ। ईश्वर से प्रार्थना है कि वे अपनी विद्या, अनुभव और सकारात्मक मार्गदर्शन से समाज का इसी प्रकार कल्याण करते रहें।
अंततः यही कहूँगा,कर्म करते रहिए, क्योंकि यदि भाग्य आपके साथ है तो कर्म उसे ऊँचाइयों तक ले जाएगा, और यदि भाग्य साथ न भी हो, तो कर्म स्वयं आपके लिए नया भाग्य लिख देगा।
लेखक उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं।


