फर्रुखाबाद। बांधों से छोड़े जा रहे पानी की मात्रा में लगातार कमी आने से गंगा और रामगंगा नदियों के जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है। इससे बाढ़ का खतरा काफी हद तक टल गया है, लेकिन गंगापार और तराई क्षेत्र के कई गांवों में कटान का सिलसिला अभी भी जारी है। कटान के कारण ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और अपनी कृषि भूमि व मकानों को बचाने के लिए लोग दिन-रात निगरानी करने को मजबूर हैं।
शनिवार को गंगा नदी का जलस्तर 15 सेंटीमीटर घटकर 135.65 मीटर पर पहुंच गया, जो चेतावनी बिंदु से नीचे है। वहीं रामगंगा नदी का जलस्तर भी 25 सेंटीमीटर कम दर्ज किया गया। सिंचाई विभाग के अनुसार नरौरा, हरिद्वार और बिजनौर बैराजों के साथ-साथ रामगंगा में भी पानी का डिस्चार्ज कम होने से अगले 24 घंटों में जलस्तर में और गिरावट की संभावना है।
हालांकि जलस्तर घटने से बाढ़ का तत्काल खतरा कम हुआ है, लेकिन कई स्थानों पर गंगा की तेज धारा खेतों और आबादी की ओर कटान कर रही है। इससे किसानों की उपजाऊ भूमि लगातार नदी में समा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कटान की वजह से उन्हें अपनी जमीन और मकानों की सुरक्षा के लिए हर समय सतर्क रहना पड़ रहा है।
प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारी संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं। यदि कटान तेज होता है तो प्रभावित गांवों में आवश्यक राहत एवं सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। फिलहाल जलस्तर में गिरावट से लोगों ने राहत की सांस जरूर ली है, लेकिन कटान का संकट अब भी चिंता का विषय बना हुआ है।


