लखनऊ
उत्तर प्रदेश कैडर के वर्ष 2023 बैच के आईएएस अधिकारी रिंकू सिंह राही इन दिनों अपने फैसलों और संघर्ष को लेकर चर्चा में हैं। शाहजहांपुर में एसडीएम के पद पर तैनाती के दौरान उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाए, लेकिन इसके तुरंत बाद उन्हें राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम से आहत होकर उन्होंने नियुक्ति विभाग सहित उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर अपनी पीड़ा व्यक्त की और व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए।
बताया जाता है कि जुलाई 2025 में शाहजहांपुर की पुवायां तहसील में तैनाती के दौरान उन्हें महज तीन दिन का कार्यकाल मिला, जिसमें एक दिन उन्होंने एसडीएम के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने जमीन की पैमाइश में गड़बड़ियों, फर्जी प्रमाणपत्रों और अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त निर्देश जारी किए। उन्होंने लेखपालों को सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों की वास्तविक रिपोर्ट देने के निर्देश दिए और तथ्य छिपाने पर आपराधिक षड्यंत्र के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी।
रिंकू सिंह राही ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए तहसील स्तर पर सूचनाओं को आमजन तक पहुंचाने हेतु व्हाट्सएप ग्रुप बनवाया और कर्मचारियों की उपस्थिति व सोशल ऑडिट की व्यवस्था लागू करने की पहल की। उन्होंने भू-नक्शों में केवल क्षेत्रफल ही नहीं, बल्कि सीमाओं की लंबाई भी दर्ज करने के निर्देश दिए, ताकि पैमाइश में होने वाली धांधली को रोका जा सके। इसके अलावा अवैध खनन और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों पर भी कड़ी कार्रवाई की बात कही।
हालांकि, उनके इन कदमों के तुरंत बाद उन्हें राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया गया, जिससे उनके प्रयासों पर विराम लग गया। अपने पत्र में उन्होंने स्वीकार किया कि एक प्रकरण में उन्होंने सांकेतिक दंड (उठक-बैठक) देकर खुद और अन्य संबंधितों को बचाने की गलती की, जिसके लिए उन्होंने स्वयं को दोषी भी ठहराया।
रिंकू सिंह राही का संघर्ष नया नहीं है। उन्होंने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि समाज कल्याण विभाग में तैनाती के दौरान वर्ष 2009 में उन्हें ईमानदारी से काम करने पर जान से मारने की धमकी मिली थी। वहीं, मुजफ्फरनगर में तैनाती के दौरान उन पर गोलीबारी भी हुई, जिसमें वह स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए।
वर्तमान में रिंकू सिंह राही ने आईएएस सेवा से तकनीकी त्यागपत्र दे दिया है। इस प्रक्रिया के तहत उनके पास पूर्व सेवा पीसीएस (एलायड) में लौटने का विकल्प मौजूद है। नियमों के अनुसार, दो वर्ष की लीन अवधि के भीतर वह अपनी पुरानी सेवा में वापस जा सकते हैं, जिसे विशेष परिस्थितियों में एक वर्ष और बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए राज्य सरकार और केंद्र स्तर पर मंजूरी आवश्यक होगी।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था, ईमानदार अधिकारियों की स्थिति और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई को लेकर नई बहस छेड़ दी है।


