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Wednesday, May 27, 2026

पीडब्ल्यूडी की ‘कागजी पुलिया’ पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा! लाखों खर्च फिर भी जल निकासी अधूरी, विभाग पर खानापूर्ति के आरोप

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सड़क काटकर दबा दिए पाइप, नहीं निकलेगा पानी!”कागजों में बनी पुलिया, जमीन पर फेल व्यवस्था!”

अमृतपुर फर्रूखाबाद

तहसील क्षेत्र के ग्राम बलीपट्टी रानीगांव में जल निकासी के नाम पर लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। जिलाधिकारी के निर्देश के बाद विभाग ने गांव के मुख्य मार्ग पर ह्यूम पाइप डलवाकर पुलिया निर्माण की कार्रवाई तो शुरू कर दी, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि पूरा काम सिर्फ “दिखावे” और “खानापूर्ति” तक सीमित रहा।ग्रामीणों का कहना है कि जिस पुलिया को जल निकासी का स्थायी समाधान बताया जा रहा है, वह तकनीकी मानकों की धज्जियां उड़ाकर बनाई गई है। आरोप है कि सड़क काटकर पाइप डाल दिए गए, लेकिन पाइपों को आपस में ठीक प्रकार से जोड़ा तक नहीं गया। ऊपर से मिट्टी डालकर गड्ढा भर दिया गया, जिससे पहली ही बारिश में पूरी व्यवस्था ध्वस्त होने की आशंका जताई जा रही है।सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जब करोड़ों की योजनाओं और सरकारी निर्देशों के बीच जल निकासी की व्यवस्था बनाई जा रही थी, तो आखिर इतनी लापरवाही क्यों बरती गई? ग्रामीणों के मुताबिक जिस स्थान पर पाइप डाले गए हैं, वहां एक तरफ तहसील परिसर की दीवार और दूसरी तरफ निजी मकान होने के कारण पानी निकासी का रास्ता ही स्पष्ट नहीं दिखाई देता। ऐसे में यह निर्माण कार्य लोगों को सिर्फ सरकारी धन की बर्बादी और विभागीय खानापूर्ति नजर आ रहा है।मौके पर नायब तहसीलदार अभिषेक सिंह, पीडब्ल्यूडी के जेई वीर बहादुर तथा थाना अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह पुलिस बल के साथ मौजूद रहे, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि किसी अधिकारी ने निर्माण की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया। जब पीडब्ल्यूडी के जेई वीर बहादुर से सवाल पूछे गए तो उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।उधर, अधिशासी अभियंता अशोक कुमार ने दावा किया कि जल निकासी के लिए नई पुलिया का निर्माण कराया जा रहा है और जल्द ही चैंबर बनाकर कार्य को दुरुस्त किया जाएगा। लेकिन ग्रामीण पूछ रहे हैं कि अगर बाद में सुधार ही करना था, तो शुरुआत में ही सही और मजबूत निर्माण क्यों नहीं कराया गया? ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पहले से बनी पुरानी पुलिया की अनदेखी कर नई पुलिया का निर्माण शुरू कर दिया गया, जबकि पुरानी पुलिया को सुधारकर भी जलभराव की समस्या का समाधान किया जा सकता था। अब गांव के लोग पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और स्थायी जल निकासी व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।गांव में चर्चा है कि बरसात आते ही पीडब्ल्यूडी की यह “कागजी पुलिया” पहली बारिश में ही विभागीय दावों की पोल खोल सकती है।

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